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Friday, 10 January 2025

Implementation of mandatory mentioning of HSN codes in GSTR-1 & GSTR 1A

Mandatory Implementation of HSN Code Reporting in GSTR-1 and GSTR-1A

HSN codes must now be selected from a predefined drop-down menu.

Table-12 segregated into B2B and B2C tabs for separate reporting and validation.



GSTR-1 और GSTR-1A में HSN कोड अनिवार्य रूप से भरने के लिए Phase-III का कार्यान्वयन
लागू अवधि: जनवरी 2025 से शुरू होने वाले रिटर्न पीरियड से।
GSTN ने Phase-I और Phase-II की सफलता के बाद अब Phase-III लागू किया है, जिससे GSTR-1 और GSTR-1A के Table 12 में HSN कोड रिपोर्टिंग को अधिक सटीक और सरल बनाया गया है।

Phase-III में मुख्य बदलाव:

1. HSN कोड ड्रॉप-डाउन से अनिवार्य चयन:

अब HSN कोड मैन्युअल रूप से दर्ज करने की अनुमति नहीं होगी।

करदाता को सही HSN कोड एक ड्रॉप-डाउन मेन्यू से चुनना होगा।

यह सुनिश्चित करेगा कि HSN कोड सही और मान्य हों, जिससे रिपोर्टिंग त्रुटियों में कमी आए।

उदाहरण:
यदि किसी करदाता ने 5% GST के अंतर्गत आने वाला सामान बेचा है, तो वह HSN ड्रॉप-डाउन से केवल उसी कोड का चयन कर पाएंगे जो उस सामान के लिए मान्य है, जैसे कि "0101" (जिंदा जानवर)।

2. Table-12 को दो भागों में विभाजित किया गया:

B2B (Business-to-Business) सप्लाई:

पंजीकृत करदाताओं (GSTIN वाले खरीदार) को की गई आपूर्ति के लिए।

B2C (Business-to-Consumer) सप्लाई:

बिना GSTIN वाले उपभोक्ताओं को की गई आपूर्ति के लिए।

इस वर्गीकरण से डेटा स्पष्ट होगा और रिपोर्टिंग आसान होगी।

उदाहरण:

B2B: एक करदाता ने ₹1,00,000 मूल्य का माल किसी पंजीकृत व्यापारी को बेचा। इसे B2B टैब में रिपोर्ट करना होगा।

B2C: एक करदाता ने ₹2,000 का माल किसी सामान्य उपभोक्ता को बेचा। इसे B2C टैब में रिपोर्ट करना होगा।

3. डेटा मान्यकरण (Validation):

Table-12 में दर्ज सप्लाई की वैल्यू और संबंधित कर (Tax) की राशि अब स्वचालित रूप से जाँची जाएगी।

शुरुआत में चेतावनी मोड (Warning Mode):

शुरुआती चरण में, यदि कोई विसंगति (discrepancy) पाई जाती है, तो इसे केवल चेतावनी के रूप में दिखाया जाएगा।

करदाता को रिटर्न फाइल करने से रोका नहीं जाएगा, जिससे नई प्रणाली को अपनाने का समय मिलेगा।

4. विस्तृत परामर्श उपलब्ध:

GST पोर्टल पर इस बदलाव के लिए विस्तृत एडवाइजरी उपलब्ध है, जिसे करदाता को अवश्य पढ़ना चाहिए.

करदाताओं के लिए लाभ:

त्रुटियों में कमी:

ड्रॉप-डाउन सुविधा से गलत HSN कोड दर्ज करने की संभावना कम होगी।

बेहतर रिपोर्टिंग:

B2B और B2C डेटा का अलग-अलग वर्गीकरण रिपोर्टिंग को अधिक स्पष्ट बनाएगा।

सुविधाजनक बदलाव:

चेतावनी आधारित वैलिडेशन से करदाताओं को नई प्रक्रिया के साथ सहज होने का समय मिलेगा।

करदाताओं के लिए सुझाव:

इस बदलाव के अनुसार अपनी प्रक्रिया अपडेट करें।

विस्तृत एडवाइजरी को पढ़ें और सुनिश्चित करें कि HSN कोड रिपोर्टिंग सही है।


Wednesday, 8 January 2025

Online Rectification Facility Enabled for Disallowed Credits Under Section 16(4) Following Amendment by Section 16(5)

विषय: अधिसूचना संख्या 22/2024-CT, दिनांक 08/10/2024 के तहत संशोधन आवेदन दाखिल करने की सुविधा

केंद्र सरकार ने 54वीं जीएसटी परिषद की सिफारिशों के आधार पर अधिसूचना संख्या 22/2024-CT, दिनांक 08/10/2024 जारी की है, जिसमें यह घोषणा की गई है कि यदि किसी पंजीकृत व्यक्ति के खिलाफ जीएसटी अधिनियम की धारा 16(4) के उल्लंघन के कारण गलत तरीके से आईटीसी का लाभ लिया गया था, और अब धारा 16(5) और/या 16(6) के तहत वह आईटीसी पात्र हो गया है, तो वह व्यक्ति अब ऐसे आदेशों के संशोधन के लिए आवेदन कर सकता है।

अब जीएसटी पोर्टल पर करदाताओं के लिए ऐसी संशोधन आवेदन प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए एक नई सुविधा उपलब्ध कराई गई है। करदाता पोर्टल पर लॉगिन करने के बाद सेवाएं > उपयोगकर्ता सेवाएं > मेरे आवेदन पर जाएं, फिर आवेदन प्रकार में "आदेश के संशोधन के लिए आवेदन" का चयन करें और नया आवेदन बटन पर क्लिक करें।

साथ ही, एक हाइपरलिंक प्रदान किया गया है, जिससे आप आवश्यक Annexure A (वर्ड प्रारूप में) डाउनलोड कर सकते हैं। इसे आईटीसी के गलत लाभ का विवरण दर्ज करने के बाद अपलोड करना होगा, जो अब धारा 16(5) और/या 16(6) के तहत पात्र है।

संशोधन आवेदन दाखिल करने की विस्तृत प्रक्रिया को समझने के लिए कृपया निम्नलिखित लिंक पर क्लिक करें:




धारा 16(4) के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) अस्वीकृत मामलों के लिए ऑनलाइन संशोधन सुविधा अब उपलब्ध कर दी गई है। यह सुविधा सीजीएसटी अधिनियम में संशोधन के बाद लागू हुई है, जिसमें धारा 16(5) को जोड़ा गया। इस संशोधन के तहत, करदाताओं को वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2020-21 तक का ITC 30 नवंबर 2021 तक दावा करने की अनुमति दी गई थी।

संशोधन का महत्व:

यह संशोधन उन करदाताओं के लिए राहत लेकर आया है, जिन्होंने किसी कारणवश समय सीमा के भीतर ITC का दावा नहीं किया था। अब वे पोर्टल पर जाकर अपने दावों को सुधार सकते हैं और ITC वापस प्राप्त कर सकते हैं।

प्रक्रिया का मुख्य लाभ:

1. पिछले वित्तीय वर्षों का ITC पुनः दावा: वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2020-21 के ITC को संशोधन के माध्यम से वापस पाने का अवसर।

2. सुविधाजनक ऑनलाइन प्रक्रिया: GST पोर्टल पर यह सुविधा सीधी और सरल तरीके से उपलब्ध कराई गई है।

3. सीमित समयावधि: केवल वे ही दावे संशोधित किए जा सकते हैं जो संशोधित प्रावधानों के तहत पात्र हैं।

ध्यान रखने योग्य बातें:

1. संशोधन का दावा करने के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे।

2. यह सुविधा केवल उन्हीं मामलों में लागू होगी, जहां ITC अस्वीकार किया गया था।

3. प्रक्रिया करते समय पोर्टल पर दिए गए निर्देशों का पालन करें।

Saturday, 4 January 2025

Attention: Professionals Managing Partnership Firms Mandatory Compliance Under Section 194T of the Income Tax Act (Effective FY 2025-26)

धारा 194T के तहत साझेदारी फर्मों के लिए नया अनुपालन
FY 2025-26 से पार्टनर्स को भुगतान पर TDS अनिवार्य
₹20,000 से अधिक भुगतान पर 10% TDS लागू होगा
TAN प्राप्त करें और अभी तैयारी शुरू करें!

FINANCE (NO. 2) BILL 2024

सभी साझेदारी फर्मों (Partnership Firms) के पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण सूचना

धारा 194T - FY 2025-26 से नया अनुपालन अनिवार्य

धारा 194T क्या कहती है?

वित्तीय वर्ष 2025-26 से:

साझेदारी फर्मों को अपने पार्टनर्स को किए गए भुगतान पर TDS @ 10% काटना होगा, यदि कुल भुगतान ₹20,000 सालाना से अधिक हो।

कवर किए गए भुगतान: वेतन, बोनस, कमीशन, ब्याज, या रेम्यूनरेशन।

यह नियम सभी साझेदारी फर्मों पर लागू होगा, चाहे उनका टर्नओवर या ऑडिट लागू हो या नहीं।

फर्मों को अभी क्या करना चाहिए?

1. TAN (Tax Deduction and Collection Account Number) प्राप्त करें।

TAN के बिना TDS काटना और जमा करना संभव नहीं।

2. TAN के लिए अभी आवेदन करें ताकि वित्तीय वर्ष के अंत (मार्च) की भागदौड़ से बचा जा सके।
3. TDS न काटने या सही समय पर जमा न करने पर:

वित्तीय दंड लग सकता है।

पार्टनर को किए गए भुगतान का खर्च अस्वीकृत (disallow) किया जा सकता है।

उदाहरण द्वारा समझें

उदाहरण:
ABC & Co. एक साझेदारी फर्म है, जिसके दो पार्टनर हैं:

मिस्टर A: जिनको ब्याज के रूप में ₹25,000 का भुगतान हुआ।

मिस्टर B: जिनको वेतन के रूप में ₹30,000 का भुगतान हुआ।

TDS की गणना:

1. मिस्टर A को कुल भुगतान = ₹25,000 (₹20,000 से अधिक)।

TDS = 10% x ₹25,000 = ₹2,500।

2. मिस्टर B को कुल भुगतान = ₹30,000 (₹20,000 से अधिक)।

TDS = 10% x ₹30,000 = ₹3,000।

फर्म की जिम्मेदारी:

कुल TDS (₹2,500 + ₹3,000 = ₹5,500) काटे और सरकार को समय पर जमा करे।

सही समय पर TDS रिटर्न फाइल करे।

फर्मों के लिए कार्य योजना:

1. TAN के लिए तुरंत आवेदन करें।

2. अपनी अकाउंटिंग प्रणाली अपडेट करें ताकि ₹20,000 से अधिक भुगतान की पहचान करके TDS काटा जा सके।

3. अपने क्लाइंट्स को इस नई जिम्मेदारी के बारे में सूचित करें।

अभी TAN लेने और तैयारियां शुरू करने से मार्च में समय की कमी और अनुपालन में चूक से बचा जा सकता है  . 

Wednesday, 25 December 2024

विषय: लीज़ पर लिए गए वैगनों के लिए ई-वे बिल (EWB) सिस्टम में रसीद नंबर दर्ज करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश

जीएसटी एडवाइजरी: 23 दिसंबर 2024          


 यह सलाह GSTN द्वारा लीज़ पर लिए गए वैगनों (Leased Wagons) के लिए ई-वे बिल (EWB) प्रणाली में रसीद नंबर दर्ज करने के लिए प्रक्रिया को स्पष्ट करने और त्रुटियों को रोकने के लिए जारी की गई है। इन निर्देशों का पालन कर आप न केवल अनुपालन सुनिश्चित करेंगे, बल्कि अपने माल के सुचारू परिवहन में भी मदद करेंगे।

1. रसीद नंबर दर्ज करने के लिए प्रीफिक्स का उपयोग

a) लीज़ पर लिए गए वैगनों के लिए (Leased Wagons):

  • लीज़ पर लिए गए वैगनों के माध्यम से माल का परिवहन करने वाले करदाताओं को रसीद नंबर के आगे "L" प्रीफिक्स जोड़ना होगा।
  • यह प्रीफिक्स दर्शाता है कि माल लीज़ पर लिए गए वैगन द्वारा ले जाया जा रहा है।

b) अन्य रेलवे मोड्स के लिए:

  • पार्सल मैनेजमेंट सिस्टम (PMS): PWB नंबर दर्ज करते समय "P" प्रीफिक्स का उपयोग करें।
  • फ्रेट ऑपरेशन इंफॉर्मेशन सिस्टम (FOIS): RR नंबर दर्ज करते समय "F" प्रीफिक्स का उपयोग करें।

लागू तिथि:
यह प्रावधान 1 जनवरी 2025 से अनिवार्य होगा।


2. ई-वे बिल के पार्ट-B में रेल परिवहन का चयन

ई-वे बिल बनाते समय निम्नलिखित कदम उठाएं:

  1. मल्टी-ट्रांसपोर्ट मोड का चयन करें।
  2. पार्ट-B में परिवहन मोड "Rail" का चयन करें।
  3. रसीद नंबर के आगे संबंधित प्रीफिक्स जोड़कर सही प्रारूप में दर्ज करें।

उदाहरण:

  • यदि रसीद नंबर 987654321 है और माल लीज़ पर लिए गए वैगन में जा रहा है, तो इसे L987654321 के रूप में दर्ज करें।
  • यदि वही माल PMS के अंतर्गत जा रहा है, तो इसे P987654321 के रूप में दर्ज करें।

3. रसीद नंबर दर्ज करने का सही प्रारूप

लीज़ वैगनों के लिए प्रारूप:

L <रसीद नंबर>

  • उदाहरण: L123456789

PMS और FOIS के लिए प्रारूप:

  • PMS: P123456789
  • FOIS: F123456789

अधिक उदाहरण:



4. सत्यापन प्रक्रिया (Validation Process)

  • रसीद नंबर दर्ज करने के बाद, सिस्टम इसे प्रासंगिक डेटाबेस के साथ सत्यापित करेगा।
  • यदि रसीद नंबर या प्रीफिक्स गलत है, तो सिस्टम आपको अलर्ट करेगा।
  • करदाता को तुरंत त्रुटि सुधार कर सही नंबर दर्ज करना होगा।

सामान्य गलतियां:



5. मदद और समर्थन (Support)

यदि आपको किसी प्रकार की समस्या हो, तो निम्नलिखित मदद प्राप्त करें:

  1. ई-वे बिल सपोर्ट पोर्टल पर टिकट दर्ज करें।
  2. अपनी प्रविष्टि से संबंधित सभी विवरण (जैसे रसीद नंबर और प्रीफिक्स) प्रदान करें।
  3. अधिक सहायता के लिए जीएसटी हेल्पडेस्क से संपर्क करें।

6. विस्तृत उदाहरण और परिदृश्य (Scenarios):

परिदृश्य 1: लीज़ वैगन द्वारा परिवहन

  • रसीद नंबर: 678901234
  • दर्ज किया गया प्रारूप: L678901234
  • मोड: Rail

परिदृश्य 2: PMS द्वारा परिवहन

  • रसीद नंबर: 112233445
  • दर्ज किया गया प्रारूप: P112233445
  • मोड: Rail

परिदृश्य 3: FOIS द्वारा परिवहन

  • रसीद नंबर: 998877665
  • दर्ज किया गया प्रारूप: F998877665
  • मोड: Rail

7. महत्वपूर्ण सुझाव

  1. सटीक जानकारी दर्ज करें: सुनिश्चित करें कि रसीद नंबर और प्रीफिक्स सही हैं।
  2. डेटा को दोबारा जांचें: फाइनल सबमिशन से पहले रसीद नंबर और मोड का सत्यापन करें।
  3. प्रशिक्षण: अपने स्टाफ को इन नए निर्देशों के बारे में प्रशिक्षित करें।

Regard 
Adv Sarfaraj Ansari

Monday, 23 December 2024

55वीं GST काउंसिल बैठक के महत्वपूर्ण निर्णय और बदलाव

55वीं GST काउंसिल बैठक के मुख्य निर्णय:

1. पोषित चावल के कर्नल्स - GST दर में कटौती
पोषित चावल के कर्नल्स पर GST दर को 5% कर दिया गया है।
उदाहरण: यदि कोई निर्माता पोषित चावल के कर्नल्स बनाता है, तो इन वस्तुओं पर अब 5% GST लगेगा, जो पहले उच्च दर पर था।

2. जीन थेरेपी और जीवन-रक्षक दवाइयों पर GST छूट
जीन थेरेपी और जीवन-रक्षक दवाइयों पर पूरी तरह से GST छूट दी जाएगी।
उदाहरण: दुर्लभ बीमारियों या आनुवंशिक विकारों के लिए उपयोग की जाने वाली दवाइयां अब GST से मुक्त होंगी, जिससे मरीजों का खर्च कम होगा।

3. मर्चेंट एक्सपोर्ट्स पर मुआवजा उपकर (Compensation Cess) में कमी
मर्चेंट एक्सपोर्ट्स को आपूर्ति करने पर मुआवजा उपकर को 0.1% कर दिया गया है।
उदाहरण: यदि आपूर्ति करने वाला किसी निर्यातक को 1,00,000 रुपये का माल बेचता है, तो अब मुआवजा उपकर केवल 100 रुपये होगा।

4. IAEA सैंपल्स पर IGST छूट
IAEA को भेजे गए सैंपल्स पर IGST छूट, विशिष्ट शर्तों के तहत।
उदाहरण: यदि किसी देश द्वारा वैज्ञानिक परीक्षण के लिए IAEA को सैंपल्स भेजे जाते हैं, तो इन वस्तुओं पर IGST नहीं लगेगा।

5. AAC ब्लॉक्स - GST स्पष्टीकरण
50% से अधिक फ्लाई ऐश सामग्री वाले ऑटोक्लेव्ड एराटेड कंक्रीट (AAC) ब्लॉक्स पर 12% GST लागू होगा।
उदाहरण: निर्माणकर्ता यदि 50% से अधिक फ्लाई ऐश सामग्री वाले AAC ब्लॉक्स का उपयोग करते हैं, तो उन्हें 12% GST देना होगा।

6. मुफ्त आपूर्ति के लिए खाद्य सामग्री इनपुट - GST छूट
मुफ्त आपूर्ति के लिए खाद्य तैयारी के लिए उपयोग किए गए इनपुट्स पर GST छूट।
उदाहरण: यदि एक चैरिटेबल संगठन गरीबों के लिए मुफ्त भोजन तैयार करता है, तो सामग्री पर GST नहीं लगेगा।

7. कृषि से हरी और काली मिर्च पर GST छूट
कृषि उत्पादकों द्वारा बेची गई हरी और काली मिर्च पर GST नहीं लगेगा।
उदाहरण: यदि एक किसान ताजे काले मिर्च को थोक विक्रेता को बेचता है, तो उसे GST नहीं देना होगा।

8. पेमेन्ट एग्रीगेटर्स - 2000 रुपये से कम की भुगतान प्रक्रिया पर GST छूट
पेमेन्ट एग्रीगेटर्स जो 2000 रुपये से कम के भुगतानों पर प्रक्रिया करते हैं, उन्हें GST छूट मिलेगी।
उदाहरण: यदि एक पेमेन्ट एग्रीगेटर छोटे ऑनलाइन लेन-देन को प्रोसेस करता है, तो उस पर GST नहीं लगेगा।

9. पेमेन्ट गेटवे पर छूट नहीं
पेमेन्ट एग्रीगेटर्स की छूट पेमेन्ट गेटवे पर लागू नहीं होगी।
उदाहरण: यदि एक पेमेन्ट गेटवे 2000 रुपये से ऊपर के भुगतानों की प्रक्रिया करता है, तो उस पर GST लगेगा।

10. बैंकों द्वारा पेनल शुल्क पर GST नहीं
बैंकों द्वारा उधारकर्ताओं से लिए गए पेनल शुल्क पर GST नहीं लगेगा।
उदाहरण: यदि उधारकर्ता कर्ज में चूक करता है, तो बैंक द्वारा लगाए गए पेनल शुल्क पर GST नहीं लगेगा।

11. बीमा प्रीमियम दरों में कटौती पर निर्णय नहीं
GST काउंसिल ने बीमा प्रीमियम पर दर कटौती या सामान्यीकरण पर कोई निर्णय नहीं लिया।
उदाहरण: स्वास्थ्य या जीवन बीमा प्रीमियम पर वर्तमान GST दर अपरिवर्तित रहेगी।

12. स्मॉल कंपनियों के लिए सरल GST पंजीकरण प्रक्रिया
छोटे कंपनियों के लिए GST पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए काउंसिल ने अवधारणा नोट को मंजूरी दी।
उदाहरण: अब छोटे व्यवसायों को GST पंजीकरण में कम अनुपालन बाधाओं का सामना करना पड़ेगा।

13. प्री-पैकेज्ड और लेबल्ड वस्तुओं की परिभाषा में विस्तार
प्री-पैकेज्ड और लेबल्ड वस्तुओं की परिभाषा अब सभी रिटेल बिक्री के लिए तैयार वस्तुओं को शामिल करेगी।
उदाहरण: पैक किए गए खाद्य उत्पाद जैसे बिस्कुट या स्नैक्स अब इस परिभाषा के तहत आएंगे, जिससे GST के नियम समान होंगे।

14. वित्त मंत्री की मीडिया को सलाह
वित्त मंत्री ने मीडिया को दरों में कटौती या वृद्धि पर अटकलबाजी से बचने की सलाह दी।
उदाहरण: वित्त मंत्री ने कहा कि दरों में बदलाव के बारे में किसी भी समाचार को केवल आधिकारिक घोषणाओं पर आधारित होना चाहिए, न कि मीडिया की अटकलबाजी पर।

15. रीयल एस्टेट क्षेत्र में FSI पर निर्णय स्थगित
रीयल एस्टेट क्षेत्र में FSI पर RCM या FCM की लागूता पर निर्णय स्थगित किया गया।
उदाहरण: रीयल एस्टेट डेवलपर्स को FSI पर GST लागू होने के बारे में और स्पष्टीकरण का इंतजार करना होगा।

16. ATF (एविएशन टरबाइन फ्यूल) को GST के तहत लाने पर सहमति नहीं
एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) को GST के तहत लाने के प्रस्ताव पर सहमति नहीं हुई।
उदाहरण: एयरलाइंस को ईंधन पर राज्य-विशिष्ट VAT या अन्य करों का भुगतान जारी रखना होगा, न कि GST।

17. स्किल ट्रेनिंग काउंसिल के प्रशिक्षण भागीदारों को GST से छूट
स्किल ट्रेनिंग काउंसिल के प्रशिक्षण भागीदारों को GST से छूट मिलेगी।
उदाहरण: सरकारी योजनाओं के तहत कोर्स करने वाले प्रशिक्षण संस्थानों पर GST लागू नहीं होगा।

18. कैरेमलाइज्ड पॉपकॉर्न और नमकीन पॉपकॉर्न पर GST का भिन्न treatment
कैरेमलाइज्ड पॉपकॉर्न (जिसमें शक्कर मिलाई गई हो) को नमकीन पॉपकॉर्न से अलग तरीके से GST में treat किया जाएगा।
उदाहरण: शक्कर से तैयार कैरेमलाइज्ड पॉपकॉर्न पर अलग दर से GST लगेगा, जबकि नमकीन पॉपकॉर्न पर अलग दर होगी।

19. नए EVs पर 5% GST
नए इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) पर 5% GST लागू होगा।
उदाहरण: यदि कोई ग्राहक नया इलेक्ट्रिक कार खरीदता है, तो उस पर 5% GST लगेगा।

20. दूसरे हाथ के EVs पर 18% GST
दूसरे हाथ के इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री पर 18% GST लगेगा।
उदाहरण: यदि कोई डीलर एक उपयोग की गई इलेक्ट्रिक कार बेचता है, तो उसे बिक्री के मुनाफे पर 18% GST देना होगा।


Regard
एडवोकेट
Sarfaraj Ansari

कंपोजीशन करदाताओं को बड़ी राहतव्यावसायिक किराए पर रिवर्स चार्ज खत्म 10 अक्टूबर 2024 से प्रभावी

🌟 महत्वपूर्ण GST अपडेट: कंपोजिशन करदाताओं के लिए 🌟

GST काउंसिल ने हाल ही में एक बड़ा बदलाव किया है जो छोटे करदाताओं, खासतौर पर कंपोजिशन स्कीम के तहत आने वालों, को प्रभावित करेगा।

🔄 10 अक्टूबर 2024 से, रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) के तहत रजिस्टर्ड व्यक्तियों द्वारा अनरजिस्टर्ड व्यक्तियों से कमर्शियल प्रॉपर्टी किराए पर लेने पर GST लागू नहीं होगा, अगर किरायेदार कंपोजिशन करदाता है।

यह बदलाव कंपोजिशन करदाताओं को बड़ी राहत प्रदान करेगा, जो पहले RCM के तहत GST चुकाते थे लेकिन उसके लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ नहीं ले सकते थे।

मुख्य बिंदु:
1. यह राहत सिर्फ कंपोजिशन करदाताओं के लिए है, नियमित करदाताओं के लिए नहीं।

2. यह नियम 10 अक्टूबर 2024 से लागू होगा। पहले चुकाए गए टैक्स का रिफंड उपलब्ध नहीं होगा।

इस बदलाव के फायदे:
कम्प्लायंस में कमी: कंपोजिशन करदाताओं को अब इस प्रकार की लेनदेन पर RCM के तहत GST भरने की जरूरत नहीं है।

खर्चों में बचत: चूंकि कंपोजिशन करदाता ITC क्लेम नहीं कर सकते, यह बदलाव उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा।

कोई रिफंड नहीं: 10 अक्टूबर 2024 से पहले चुकाए गए GST का रिफंड नहीं मिलेगा, इसलिए सही तिथि के बाद से इस नियम का पालन करें।

सलाह:
लेनदेन की समीक्षा करें: 10 अक्टूबर 2024 के बाद के सभी रेंटल एग्रीमेंट्स और लेनदेन की जांच करें।

रिकॉर्ड्स बनाए रखें: इस नियम के तहत सही दस्तावेज़ रखें ताकि आवश्यकता पड़ने पर इसे सिद्ध किया जा सके।

भूमि मालिकों को सूचित करें: रेंटल देने वालों को इस बदलाव के बारे में जानकारी दें ताकि अनावश्यक GST चालान से बचा जा सके।

यह अपडेट छोटे करदाताओं को राहत देने और उनके अनुपालन बोझ को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

Regard
Advocate
Sarfaraj Ansari

Sunday, 1 December 2024

उच्च न्यायालय का निर्देश, आदेश से पहले व्यक्तिगत सुनवाई अनिवार्यप्राकृतिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए जीएसटी विभाग की सख्त कार्रवाई जारी किया Circular (नम्बर- 1518)

उत्तर प्रदेश जीएसटी विभाग ने अधिकारियों को करदाताओं के खिलाफ आदेश पारित करने से पहले उचित व्यक्तिगत सुनवाई प्रदान करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह कदम इलाहाबाद उच्च न्यायालय के कई आदेशों के बाद उठाया गया है, जिसमें व्यक्तिगत सुनवाई न देने को प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन के रूप में देखा गया।

धारा 75(4) के तहत यह अनिवार्य है कि यदि करदाता सुनवाई की मांग करता है या प्रतिकूल निर्णय की संभावना है, तो व्यक्तिगत सुनवाई दी जानी चाहिए। हाल ही में, अदालत ने सुनवाई के बिना पारित आदेशों को रद्द कर दिया और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सुनवाई की तारीख और समय स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट हों। इसके साथ ही, जिन अधिकारियों ने इस नियम का पालन नहीं किया, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।

28 नवंबर 2024 को Circular संख्या 1518 जारी किया गया, जिसमें यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं कि आदेश पास करने से पहले सुनवाई का उचित अवसर दिया जाए।




Thursday, 28 November 2024

"PAN 2.0: पैन सेवाओं का एकीकृत और स्मार्ट समाधान"



PAN 2.0 परियोजना के तहत मौजूदा पैन कार्ड धारकों को नया पैन बनवाने की आवश्यकता नहीं होगी। उनका वर्तमान पैन कार्ड PAN 2.0 में भी पूरी तरह मान्य रहेगा।

यह परियोजना पैन और टैन से जुड़ी सभी सेवाओं को एक ही पोर्टल पर उपलब्ध कराएगी, जिससे सभी सेवाओं का उपयोग करना सरल और सुविधाजनक हो जाएगा। इस पोर्टल पर निम्नलिखित सेवाएं मिलेंगी:

पैन/टैन का आवंटन, सुधार और अपडेट

ऑनलाइन पैन सत्यापन (OPV)

अपने AO (असेसिंग ऑफिसर) की जानकारी

आधार-पैन लिंकिंग

पैन सत्यापन और ई-पैन डाउनलोड

पैन कार्ड की पुनः प्रिंटिंग


PAN 2.0 में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है, जो डुप्लीकेट पैन आवेदनों की पहचान और निपटान के लिए एक मजबूत और केंद्रीकृत प्रणाली प्रदान करेगा। इससे एक व्यक्ति के पास एक से अधिक पैन कार्ड होने की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी, जिससे पैन से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक सुरक्षित और पारदर्शी होंगी।


Monday, 25 November 2024

व्यवसायिक किराए पर GST: रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) और अनुपालन निर्देश

व्यवसायिक किराए पर GST: रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) और अनुपालन निर्देश

GST कानून के तहत, व्यवसायिक संपत्ति के किराए पर रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) के प्रावधान लागू होते हैं। यदि मकान मालिक GST पंजीकृत नहीं है या किराए पर GST चार्ज नहीं करता, तो किराएदार को रिवर्स चार्ज के तहत टैक्स का भुगतान करना अनिवार्य है।


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क्या करें:

1. रेंट एग्रीमेंट की समीक्षा करें:

किराए की राशि और शर्तें स्पष्ट होनी चाहिए।

यदि मकान मालिक पंजीकृत है और GST चार्ज कर रहा है, तो उसकी GSTIN और इनवॉइस की जांच करें।



2. RCM के तहत भुगतान:

यदि मकान मालिक पंजीकृत नहीं है और प्रॉपर्टी व्यवसायिक उपयोग के लिए किराए पर दी गई है, तो किराएदार को हर माह GST रिवर्स चार्ज के तहत भुगतान करना होगा।

GST रेट: किराए की राशि पर 18% लागू होता है।



3. GSTR-3B में रिपोर्टिंग:

रिवर्स चार्ज के तहत भुगतान की गई GST को GSTR-3B में सही कॉलम में रिपोर्ट करें।

यदि आप GST पंजीकृत हैं, तो इसे ITC के रूप में क्लेम कर सकते हैं, यदि अन्य शर्तें पूरी होती हैं।










Sunday, 17 November 2024

Representation Regarding Non-Notification of Late Fee Table in GSTR-1Request to Drop Proceedings for Imposition of Late Fees

प्रार्थना पत्र

विषय: GSTR-1 पर विलंब शुल्क के संबंध में अपील

सेवा में,
(संबंधित अधिकारी का नाम),
(कार्यालय का पता)

मान्यवर,

निवेदन है कि निम्नलिखित तथ्यों के आधार पर GSTR-1 पर विलंब शुल्क लगाने के लिए की गई कार्रवाई को वापस लिया जाए:

1. विलंब शुल्क की तालिका GSTR-1 में अधिसूचित नहीं है

यद्यपि GST अधिनियम की धारा 47 में विलंब शुल्क लगाने का प्रावधान है और धारा 37 को शामिल किया गया है, परंतु GSTR-1 फॉर्म (जो कि नियम 59(1) के तहत अधिसूचित है) में विलंब शुल्क के लिए कोई तालिका नहीं है।

जब तक विलंब शुल्क की तालिका GSTR-1 फॉर्म में अधिसूचित नहीं होती, तब तक इसे पोर्टल पर लागू नहीं किया जा सकता और सरकार इसे वसूल नहीं कर सकती।



2. GSTR-8 पर विलंब शुल्क का उदाहरण

GSTR-8 (TCS रिटर्न) पर 26.10.2022 से पहले कोई विलंब शुल्क नहीं था।

सरकार ने विलंब शुल्क लागू करने के बाद GSTR-8 फॉर्म में ब्याज और विलंब शुल्क भुगतान की तालिका जोड़ी, और तभी इसे वसूलना शुरू किया।

GSTR-1 में ऐसी कोई तालिका अब तक अधिसूचित नहीं हुई है।



3. GSTR-1 रिटर्न नहीं, बल्कि स्टेटमेंट है

GST कानून के अनुसार GSTR-1 एक स्टेटमेंट है, रिटर्न नहीं। अतः विलंब शुल्क लागू नहीं होना चाहिए।



4. विलंब शुल्क पोर्टल पर स्वतः लागू करने का प्रस्ताव अधिसूचित नहीं हुआ

45वीं GST परिषद बैठक (17 सितंबर 2021) में यह अनुशंसा की गई थी कि GSTR-1 का विलंब शुल्क अगले खुले रिटर्न (GSTR-3B) में स्वतः जोड़ा जाएगा।

यह अनुशंसा आज तक अधिसूचित नहीं हुई है।



5. प्रारंभिक वर्षों में विलंब शुल्क नहीं लगाया गया

GST के प्रारंभिक वर्षों में GSTR-1 पर कभी भी विलंब शुल्क नहीं लगाया गया।



6. विलंब शुल्क छोटे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ डालता है

विलंब शुल्क देरी के दिनों के आधार पर लिया जाता है, जिससे छोटे व्यापारियों को भारी आर्थिक बोझ सहना पड़ता है।




प्रार्थना:
उपरोक्त तथ्यों के आधार पर निवेदन है कि आपके कार्यालय से इस संबंध में की गई कार्रवाई को वापस लिया जाए। यदि आपके द्वारा कोई प्रतिकूल आदेश पारित किया जाना हो, तो हमें अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया जाए।

दिनांक: __________
आपका विश्वासी,
(अपना नाम और विवरण)


Representation

Subject: Request to Drop Proceedings Related to Late Fees on GSTR-1

To,
The Concerned Officer,
(Office Address)

Respected Sir/Madam,

I hereby submit this representation regarding the imposition of late fees on GSTR-1 filings. The following points are submitted for your kind consideration:

1. Non-Notification of Late Fee Table in GSTR-1

Section 47 of the GST Act provides for the levy of late fees, and Section 37 includes provisions for GSTR-1. However, the prescribed Form GSTR-1 (as per Rule 59(1)) does not include a table for late fees.

Without notifying this table in the form, the GST portal cannot operationalize the levy of late fees. Thus, in the absence of notification in the prescribed form, the late fees cannot legally be collected.


2. Case of GSTR-8 Late Fee Notification

Initially, there was no late fee provision for GSTR-8 (TCS Returns). With effect from 26.10.2022, the government decided to levy late fees on GSTR-8 and amended Section 47 to include this.

When this levy was implemented, the Form GSTR-8 was updated to include a table for interest and late fees payable and paid. Only after this notification was the late fee imposed on GSTR-8 filings.

In contrast, the Form GSTR-1 has not been updated with a similar table, and no such notification has been issued to date.


3. GSTR-1 is a Statement, Not a Return

As per the GST Law, GSTR-1 is a statement of outward supplies and not a return. Therefore, the levy of late fees on GSTR-1 is not consistent with the legal framework.


4. 45th GST Council Meeting Recommendations

The Ministry of Finance, in the 45th GST Council meeting on 17th September 2021, recommended that late fees for delayed filing of GSTR-1 should be auto-populated and collected in the next open return (GSTR-3B).

It was further suggested that this mechanism would apply prospectively from July 2021. However, this recommendation has not been notified or implemented on the GST portal to date.


5. No Late Fees Charged Initially

During the initial years of GST implementation, late fees were not charged for delayed GSTR-1 filings. The GST system did not calculate or impose such fees for GSTR-1 during that period.


6. Financial Burden on Taxpayers

The late fee is calculated based on the number of days of delay, which can impose a significant financial burden, particularly on small businesses, even when no tax liability arises from GSTR-1 filings.


Prayer

In view of the above submissions, it is respectfully requested that the proceedings for imposing late fees on GSTR-1 filings be dropped. Additionally, if an adverse order is proposed, we request an opportunity to present our case before such an order is passed.

Date: __________
Yours sincerely,
(Name)
(Designation/Contact Details)