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Sunday, 17 November 2024

Representation Regarding Non-Notification of Late Fee Table in GSTR-1Request to Drop Proceedings for Imposition of Late Fees

प्रार्थना पत्र

विषय: GSTR-1 पर विलंब शुल्क के संबंध में अपील

सेवा में,
(संबंधित अधिकारी का नाम),
(कार्यालय का पता)

मान्यवर,

निवेदन है कि निम्नलिखित तथ्यों के आधार पर GSTR-1 पर विलंब शुल्क लगाने के लिए की गई कार्रवाई को वापस लिया जाए:

1. विलंब शुल्क की तालिका GSTR-1 में अधिसूचित नहीं है

यद्यपि GST अधिनियम की धारा 47 में विलंब शुल्क लगाने का प्रावधान है और धारा 37 को शामिल किया गया है, परंतु GSTR-1 फॉर्म (जो कि नियम 59(1) के तहत अधिसूचित है) में विलंब शुल्क के लिए कोई तालिका नहीं है।

जब तक विलंब शुल्क की तालिका GSTR-1 फॉर्म में अधिसूचित नहीं होती, तब तक इसे पोर्टल पर लागू नहीं किया जा सकता और सरकार इसे वसूल नहीं कर सकती।



2. GSTR-8 पर विलंब शुल्क का उदाहरण

GSTR-8 (TCS रिटर्न) पर 26.10.2022 से पहले कोई विलंब शुल्क नहीं था।

सरकार ने विलंब शुल्क लागू करने के बाद GSTR-8 फॉर्म में ब्याज और विलंब शुल्क भुगतान की तालिका जोड़ी, और तभी इसे वसूलना शुरू किया।

GSTR-1 में ऐसी कोई तालिका अब तक अधिसूचित नहीं हुई है।



3. GSTR-1 रिटर्न नहीं, बल्कि स्टेटमेंट है

GST कानून के अनुसार GSTR-1 एक स्टेटमेंट है, रिटर्न नहीं। अतः विलंब शुल्क लागू नहीं होना चाहिए।



4. विलंब शुल्क पोर्टल पर स्वतः लागू करने का प्रस्ताव अधिसूचित नहीं हुआ

45वीं GST परिषद बैठक (17 सितंबर 2021) में यह अनुशंसा की गई थी कि GSTR-1 का विलंब शुल्क अगले खुले रिटर्न (GSTR-3B) में स्वतः जोड़ा जाएगा।

यह अनुशंसा आज तक अधिसूचित नहीं हुई है।



5. प्रारंभिक वर्षों में विलंब शुल्क नहीं लगाया गया

GST के प्रारंभिक वर्षों में GSTR-1 पर कभी भी विलंब शुल्क नहीं लगाया गया।



6. विलंब शुल्क छोटे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ डालता है

विलंब शुल्क देरी के दिनों के आधार पर लिया जाता है, जिससे छोटे व्यापारियों को भारी आर्थिक बोझ सहना पड़ता है।




प्रार्थना:
उपरोक्त तथ्यों के आधार पर निवेदन है कि आपके कार्यालय से इस संबंध में की गई कार्रवाई को वापस लिया जाए। यदि आपके द्वारा कोई प्रतिकूल आदेश पारित किया जाना हो, तो हमें अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया जाए।

दिनांक: __________
आपका विश्वासी,
(अपना नाम और विवरण)


Representation

Subject: Request to Drop Proceedings Related to Late Fees on GSTR-1

To,
The Concerned Officer,
(Office Address)

Respected Sir/Madam,

I hereby submit this representation regarding the imposition of late fees on GSTR-1 filings. The following points are submitted for your kind consideration:

1. Non-Notification of Late Fee Table in GSTR-1

Section 47 of the GST Act provides for the levy of late fees, and Section 37 includes provisions for GSTR-1. However, the prescribed Form GSTR-1 (as per Rule 59(1)) does not include a table for late fees.

Without notifying this table in the form, the GST portal cannot operationalize the levy of late fees. Thus, in the absence of notification in the prescribed form, the late fees cannot legally be collected.


2. Case of GSTR-8 Late Fee Notification

Initially, there was no late fee provision for GSTR-8 (TCS Returns). With effect from 26.10.2022, the government decided to levy late fees on GSTR-8 and amended Section 47 to include this.

When this levy was implemented, the Form GSTR-8 was updated to include a table for interest and late fees payable and paid. Only after this notification was the late fee imposed on GSTR-8 filings.

In contrast, the Form GSTR-1 has not been updated with a similar table, and no such notification has been issued to date.


3. GSTR-1 is a Statement, Not a Return

As per the GST Law, GSTR-1 is a statement of outward supplies and not a return. Therefore, the levy of late fees on GSTR-1 is not consistent with the legal framework.


4. 45th GST Council Meeting Recommendations

The Ministry of Finance, in the 45th GST Council meeting on 17th September 2021, recommended that late fees for delayed filing of GSTR-1 should be auto-populated and collected in the next open return (GSTR-3B).

It was further suggested that this mechanism would apply prospectively from July 2021. However, this recommendation has not been notified or implemented on the GST portal to date.


5. No Late Fees Charged Initially

During the initial years of GST implementation, late fees were not charged for delayed GSTR-1 filings. The GST system did not calculate or impose such fees for GSTR-1 during that period.


6. Financial Burden on Taxpayers

The late fee is calculated based on the number of days of delay, which can impose a significant financial burden, particularly on small businesses, even when no tax liability arises from GSTR-1 filings.


Prayer

In view of the above submissions, it is respectfully requested that the proceedings for imposing late fees on GSTR-1 filings be dropped. Additionally, if an adverse order is proposed, we request an opportunity to present our case before such an order is passed.

Date: __________
Yours sincerely,
(Name)
(Designation/Contact Details)



Thursday, 14 November 2024

जीएसटी में इनवॉइस मैचिंग सिस्टम (IMS): प्रमुख विशेषताएं और कार्य करने के नियम

जीएसटी में इनवॉइस मैचिंग सिस्टम (IMS) से जुड़े मुख्य बिंदु:

1. लॉन्च की तारीख: IMS को 1 अक्टूबर से शुरू किया गया है।


2. GSTR-3B दाखिल करने पर रिकॉर्ड का हटना: एक विशिष्ट GSTR-2B अवधि के लिए GSTR-3B दाखिल होने के बाद उस अवधि के सभी स्वीकृत या अस्वीकृत रिकॉर्ड्स IMS से हटा दिए जाएंगे। केवल पेंडिंग रिकॉर्ड्स और भविष्य की अवधि के इनवॉइस ही IMS में बने रहेंगे।


3. दस्तावेज़ों की रियल-टाइम उपलब्धता: सप्लायर द्वारा GSTR-1, GSTR-1A या IFF में अपलोड किए गए दस्तावेज तुरंत IMS में प्राप्तकर्ता के लिए कार्रवाई हेतु उपलब्ध हो जाते हैं।


4. डिफॉल्ट स्टेटस - नो एक्शन: डिफॉल्ट रूप से, सभी रिकॉर्ड्स "नो एक्शन" श्रेणी में चले जाते हैं, और GSTR-2B जनरेशन के समय "नो एक्शन" वाले रिकॉर्ड को स्वीकृत माना जाएगा।


5. मल्टीपल एक्शन की अनुमति: GSTR-3B दाखिल करने से पहले प्राप्तकर्ता किसी दस्तावेज पर कई बार कार्रवाई कर सकते हैं। अंतिम एक्शन पिछली कार्रवाई को ओवरराइट कर देगा।


6. कार्रवाई के आधार पर दस्तावेजों का व्यवहार:

Accept: स्वीकृत रिकॉर्ड GSTR-2B के ‘ITC Available’ भाग में आ जाते हैं और GSTR-3B में स्वचालित रूप से शामिल हो जाते हैं।

Reject: अस्वीकृत रिकॉर्ड GSTR-2B के ‘ITC Rejected’ भाग में चले जाते हैं और GSTR-3B में शामिल नहीं होते।

Pending: पेंडिंग रिकॉर्ड्स IMS पर बने रहते हैं और GSTR-2B तथा GSTR-3B में शामिल नहीं होते। ये रिकॉर्ड तब तक IMS में रहते हैं जब तक कि उन्हें स्वीकार या अस्वीकार नहीं किया जाता, या धारा 16(4) में निर्दिष्ट समय सीमा समाप्त नहीं हो जाती।

No Action: "नो एक्शन" स्थिति वाले रिकॉर्ड GSTR-2B जनरेशन के समय स्वीकृत माने जाएंगे।



7. RCM इनवॉइस का IMS से बहिष्कार: RCM इनवॉइस IMS में शामिल नहीं हैं, लेकिन GSTR-2B में हमेशा की तरह दिखते हैं।


8. एक्सेल डाउनलोड सुविधा: IMS डेटा को एक्सेल में डाउनलोड किया जा सकता है।


9. क्रियाओं का समय और GSTR-2B ऑटो-पॉप्युलेशन: यदि GSTR-2B जनरेशन से पहले रिकॉर्ड्स पर कार्रवाई की गई है, तो वे GSTR-3B में स्वतः शामिल हो जाते हैं। यदि GSTR-2B जनरेशन के बाद कार्रवाई की गई, तो प्राप्तकर्ता को GSTR-3B में "Compute GSTR-2B" पर क्लिक करना होगा ताकि बाद की कार्रवाइयों का प्रभाव जोड़ा जा सके।


10. GSTR-2B जनरेशन के लिए फाइलिंग शर्त: यदि पिछली अवधि का GSTR-3B दाखिल नहीं किया गया है, तो अगले महीने की 14 तारीख को ड्राफ्ट GSTR-2B जनरेट नहीं होगा।


11. त्रैमासिक करदाताओं के लिए: तिमाही आधार पर रिटर्न भरने वाले करदाताओं के लिए तिमाही के पहले दो महीनों (M1 और M2) के लिए GSTR-2B जनरेट नहीं होगा।


12. GSTR-2A का निरंतर जनरेशन: GSTR-2A पूर्व की तरह जनरेट होता रहेगा।


13. पुनः गणना की आवश्यकता: यदि GSTR-2B ड्राफ्ट जनरेशन के बाद IMS डैशबोर्ड पर प्राप्तकर्ता द्वारा कोई बदलाव किए जाते हैं, तो GSTR-2B की पुनः गणना अनिवार्य है।


14. कार्रवाई की परिभाषाएं:



Accept: लेन-देन प्राप्तकर्ता के व्यवसाय से संबंधित हैं।

Reject: लेन-देन प्राप्तकर्ता के व्यवसाय से संबंधित नहीं हैं (यह केवल आईटीसी न लेने का मतलब नहीं है)।

Pending: लेन-देन प्राप्तकर्ता के व्यवसाय से संबंधित हैं, लेकिन वर्तमान जीएसटी प्रावधानों के कारण आईटीसी के लिए पात्र नहीं हैं।



Tuesday, 12 November 2024

वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए ITC क्लेम: महत्वपूर्ण GST नियम, शर्तें, और अनुपालन दिशा-निर्देश

FY 2023-24 के लिए ITC (इनपुट टैक्स क्रेडिट) को अंतिम रूप देने के प्रमुख नियम और धाराएं

GST कानून में ITC से संबंधित प्रावधानों का पालन करना महत्वपूर्ण है ताकि आपका ITC क्लेम नियमों के अनुरूप हो और आप किसी भी संभावित पेनल्टी या दंड से बच सकें। यहाँ कुछ मुख्य नियम और धाराओं का विवरण है जो FY 2023-24 के लिए ITC क्लेम करने में आपकी सहायता करेंगे:


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1. ITC पात्रता और आवश्यक शर्तें

धारा 16: ITC पात्रता और आवश्यक शर्तों का प्रावधान करती है, जिसमें केवल वे ही इनपुट क्रेडिट क्लेम किए जा सकते हैं जो व्यवसाय के लिए उपयोग में आए हैं।

धारा 16(2)(c): यह स्पष्ट करती है कि ITC क्लेम तभी मान्य है जब सप्लायर द्वारा सरकार को टैक्स का भुगतान किया गया हो। अगर सप्लायर ने टैक्स नहीं जमा किया है, तो ITC क्लेम अवैध हो सकता है।

धारा 16(4): ITC क्लेम की समयसीमा के अनुसार, वित्तीय वर्ष समाप्ति के बाद अक्टूबर माह की GSTR-3B दाखिल करने की अंतिम तिथि या वार्षिक रिटर्न की अंतिम तिथि (जो भी पहले हो) तक ही ITC क्लेम कर सकते हैं।



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2. इनवॉइस मैचिंग और ITC मिलान प्रक्रिया

धारा 37 और 38: यह धाराएं GSTR-1 और GSTR-2B के माध्यम से इनवॉइस के विवरण दाखिल करने के प्रावधान करती हैं। इसमें दोनों पक्षों (सप्लायर और खरीदार) द्वारा इनवॉइस डेटा का मिलान सुनिश्चित किया जाता है।

रूल 36(4): इस नियम के अनुसार, केवल उन्हीं इनपुट टैक्स क्रेडिट का क्लेम किया जा सकता है जो GSTR-2B में उपलब्ध हों; मैन्युअल प्रविष्टियों पर प्रतिबंध है।

धारा 42: इसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट का मिलान और संशोधन प्रक्रिया का उल्लेख है, जिससे किसी भी गलत ITC को सही किया जा सकता है।



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3. सप्लायर कंप्लायंस की समीक्षा और ITC पर प्रभाव

धारा 16(2)(c): यह उपधारा ITC को सप्लायर द्वारा किए गए टैक्स भुगतान से जोड़ती है। अगर सप्लायर टैक्स जमा नहीं करता है, तो ITC अमान्य हो सकता है।

धारा 122(1A): इसके तहत, अगर सप्लायर टैक्स जमा नहीं करता है और ITC का लाभ लिया गया है, तो क्लेम करने वाले पर पेनल्टी लगाई जा सकती है। इसलिए सप्लायर की GSTR फाइलिंग स्थिति की नियमित समीक्षा आवश्यक है।



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4. ब्लॉक्ड क्रेडिट्स (अवरुद्ध क्रेडिट्स)

धारा 17(5): इसमें उन क्रेडिट्स की सूची दी गई है जिन पर ITC का लाभ नहीं लिया जा सकता, जैसे कि मोटर वाहन, मनोरंजन सेवाएं, भोजन, यात्रा, व्यक्तिगत उपयोग के सामान, आदि।

इन वस्तुओं और सेवाओं पर ITC नहीं लिया जा सकता है, जिससे सुनिश्चित किया जा सके कि केवल वैध और अनुमत इनपुट टैक्स क्रेडिट ही क्लेम किए जा रहे हैं।



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5. प्रोविजनल ITC और कैरी-फॉरवर्ड क्रेडिट्स

धारा 41: इस धारा के अनुसार, प्रोविजनल ITC का क्लेम अस्थायी होता है और सप्लायर द्वारा टैक्स जमा न करने की स्थिति में उसे वापस भुगतान करना होता है।

धारा 16: पुराने या कैरी-फॉरवर्ड किए गए क्रेडिट्स का उपयोग तभी किया जा सकता है जब वे वैध हों और संबंधित टैक्स का भुगतान किया गया हो।



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6. रिकॉर्ड कीपिंग और दस्तावेजीकरण

धारा 35: यह धारा GST रिकॉर्ड रखने और सभी ITC क्लेम्स का दस्तावेजीकरण करने के प्रावधानों को बताती है, ताकि भविष्य में ऑडिट के समय सभी क्लेम सही ठहराए जा सकें।

धारा 36: इसके अनुसार, सभी GST संबंधित दस्तावेजों को 72 महीने तक सुरक्षित रखना आवश्यक है।

धारा 49: ITC को भुगतान के रूप में कैसे उपयोग किया जाए, इस पर प्रावधान देती है। इस धारा का पालन करते हुए, सभी दस्तावेज और क्लेम वैध और ट्रेसबल बनाए जा सकते हैं।



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इन प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करके ITC क्लेम को मजबूत, वैध और नियमों के अनुसार पूरा किया जा सकता है।

रूल 86B अनुपालन पर पंजीकरण बहाल; समान मामले में दोहरी SCN पर रोक

यहां दो हालिया जीएसटी फैसलों का सारांश दिया गया है जो रूल 86B के अंतर्गत जीएसटी पंजीकरण के निलंबन और केंद्रीय व राज्य जीएसटी अधिकारियों द्वारा समान मामले में समानांतर कार्यवाही पर केंद्रित हैं:

1. रूल 86B के अनुपालन पर जीएसटी पंजीकरण की बहाली
उज्ज्वल गर्ग बनाम आयुक्त, व्यापार और कर विभाग मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि रूल 86B के उल्लंघन के कारण जीएसटी पंजीकरण का निलंबन आवश्यक राशि जमा करने के बाद समाप्त कर दिया जाना चाहिए। मामले में, याचिकाकर्ता का पंजीकरण निलंबित कर दिया गया था क्योंकि उसने अपने कर देयता का 99% से अधिक हिस्सा इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर का उपयोग कर चुका था, जो कि रूल 86B के विरुद्ध था। याचिकाकर्ता ने बाद में 80,000 रुपये जमा किए, जिसके बाद न्यायालय ने माना कि जीएसटी पंजीकरण का निलंबन व्यापारी के व्यवसाय पर व्यापक प्रतिकूल प्रभाव डालता है और इसे गहन विचार के बाद ही किया जाना चाहिए। इसलिए, न्यायालय ने तुरंत याचिकाकर्ता का पंजीकरण बहाल करने का आदेश दिया।


2. समान मामले में राज्य जीएसटी प्राधिकरण द्वारा दूसरी SCN जारी करने पर रोक
टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (प्रा.) लिमिटेड बनाम भारत संघ मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अगर किसी मामले में केंद्रीय जीएसटी प्राधिकरण ने पहले ही नोटिस (SCN) जारी कर दिया है, तो राज्य जीएसटी प्राधिकरण समान मामले में दोबारा नोटिस जारी नहीं कर सकता है। इस मामले में, केंद्रीय जीएसटी ने पहले आईटीसी से संबंधित नोटिस जारी किए थे, जिसके बाद राज्य जीएसटी ने उसी विषय में फिर से नोटिस जारी किया। न्यायालय ने इसे बिना अधिकार क्षेत्र के घोषित कर राज्य जीएसटी का नोटिस निरस्त कर दिया और मामले को केंद्रीय जीएसटी को पुनर्विचार के लिए भेजा, जिसमें सर्कुलर संख्या 211/5/24-जीएसटी और बॉश लिमिटेड के फैसले का संदर्भ दिया गया।



इन मामलों से यह स्पष्ट होता है कि कर अधिकारियों को नियमों का पालन करना चाहिए और करदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए समान मामले में दोहरी कार्यवाही या अत्यधिक दंडात्मक कार्रवाई से बचना चाहिए।



Wednesday, 6 November 2024

Important Update on Personal Hearings in GST

🚨 जीएसटी में व्यक्तिगत सुनवाई पर विस्तृत जानकारी

📌 सीबीआईसी का नया निर्देश (5 नवंबर 2024)
अब जीएसटी मामलों की सुनवाई मुख्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से होगी। यह फैसला डिजिटल प्रक्रियाओं को प्रोत्साहित करने और सुनवाई प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से किया गया है।

📌 शारीरिक (फिजिकल) सुनवाई की प्रक्रिया
यदि किसी पार्टी को फिजिकल सुनवाई की आवश्यकता महसूस होती है, तो वह इसके लिए विशेष अनुरोध कर सकती है। इस अनुरोध को स्वीकार करने के लिए उचित कारण प्रस्तुत करना आवश्यक होगा, और अधिकारी इसे रिकॉर्ड में दर्ज करेंगे। इसका मतलब यह है कि केवल जायज कारण होने पर ही शारीरिक सुनवाई की अनुमति मिलेगी।

📌 पुराने निर्देशों की पुन: स्थापना
इस नए निर्देश में 21 अगस्त 2020 के दिशा-निर्देशों को फिर से लागू किया गया है, जो वर्चुअल सुनवाई की व्यवस्था की ओर अग्रसर थे। 28 जुलाई 2022 में किए गए संशोधन को हटा दिया गया है, जिसमें शारीरिक सुनवाई को अधिक प्राथमिकता दी गई थी।

📌 इस बदलाव के लाभ

1. समय और खर्च की बचत – वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई से समय और यात्रा खर्च में कमी आएगी।


2. सुलभता और लचीलापन – पार्टियां दूर से भी सुनवाई में शामिल हो सकती हैं, जिससे प्रक्रिया में सुविधा बढ़ेगी।


3. डिजिटल साक्ष्य प्रस्तुत करने में आसानी – वर्चुअल सुनवाई में डिजिटल दस्तावेज़ और सबूत प्रस्तुत करना आसान हो जाता है, जिससे प्रक्रिया तेज होती है।



📌 कब शारीरिक सुनवाई उपयुक्त हो सकती है?

जब मामलों में जटिल कानूनी या तकनीकी प्रश्न हों।

जब पक्षकार या उनका प्रतिनिधि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा का उपयोग करने में असमर्थ हों।

विशेष परिस्थितियों में, जब भौतिक साक्ष्यों की जांच आवश्यक हो।


निष्कर्ष
यह नया नियम प्रक्रिया को डिजिटल रूप में आगे बढ़ाने के साथ-साथ इसे तेज और सुविधाजनक बनाने का प्रयास है। साथ ही, जरूरतमंद मामलों के लिए शारीरिक सुनवाई का विकल्प भी खुला रखा गया है, जिससे सुनवाई में न्यायसंगतता और पारदर्शिता बनी रहे।

Wednesday, 30 October 2024

Rule 47A of the CGST Rules – Effective from 1st November 2024🔹Explanation of Relevant Sections of the CGST Act, 2017🔹List of services under the Reverse Charge Mechanism (RCM) in GST as of October 2024

यहाँ Rule 47A और GST से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण विषयों का हिंदी में विवरण दिया गया है:

1. CGST नियम 47A (1 नवंबर 2024 से लागू)

नियम 47A को CGST ढांचे में विशेष अनुपालन या प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं को संबोधित करने के लिए प्रस्तुत किया गया है। इसके कार्यान्वयन का उद्देश्य इनवॉइसिंग, रिटर्न फाइलिंग, या अन्य संचालन संबंधी आवश्यकताओं को हाल के GST संशोधनों के साथ संगत बनाना हो सकता है। इसके सटीक प्रावधान आधिकारिक अधिसूचना और नियमों पर निर्भर होंगे।

2. CGST अधिनियम, 2017 के संबंधित प्रावधान

GST अनुपालन और प्रक्रियात्मक पहलुओं से संबंधित प्रमुख धाराएं इस प्रकार हैं:

धारा 9(3): उन सेवाओं या वस्तुओं के लिए उलटा शुल्क प्रणाली (RCM) निर्दिष्ट करता है, जहां प्राप्तकर्ता को कर का भुगतान करना होता है।

धारा 16: इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) प्राप्त करने की शर्तों का उल्लेख करती है।

धारा 31(3)(f): RCM लेनदेन के लिए इनवॉइस जारी करने का प्रावधान करती है, जिसमें यह आवश्यक है कि यदि आपूर्तिकर्ता पंजीकृत नहीं है तो प्राप्तकर्ता स्वयं एक इनवॉइस जारी करे।

धारा 49: GST के तहत कर, ब्याज, जुर्माना और अन्य राशियों के भुगतान को नियंत्रित करता है।

धारा 50: कर भुगतान में देरी होने पर ब्याज देयता को निर्दिष्ट करता है।

धारा 73/74: मांग और वसूली प्रावधानों को कवर करती है, जहां कर अनुत्तरित होता है या ITC गलत तरीके से लिया जाता है।


3. अक्टूबर 2024 तक उलटा शुल्क प्रणाली (RCM) के तहत सेवाओं की सूची

RCM के तहत जिन सेवाओं पर प्राप्तकर्ता को कर अनुपालन की ज़िम्मेदारी होती है, उनमें प्रमुख सेवाएं निम्नलिखित हैं:

वकील द्वारा सेवाएं (व्यवसायिक इकाइयों को प्रदान की जाने वाली कानूनी सेवाएं)।

मोटर वाहन किराए पर देने की सेवाएं (यदि सेवा प्रदाता GST में पंजीकृत नहीं है)।

गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसी (GTA) द्वारा सेवाएं (सड़क मार्ग से सामान का परिवहन)।

स्पॉन्सरशिप सेवाएं (जहाँ प्रायोजक को GST का भुगतान करना होता है)।

निदेशक द्वारा सेवाएं (कुछ मामलों में निदेशकों को दिए गए पारिश्रमिक)।

बीमा एजेंट द्वारा सेवाएं (बीमा व्यवसाय को दी जाने वाली)।

सुरक्षा सेवाओं की आपूर्ति (यदि प्रदाता पंजीकृत नहीं है)।

कैज़ुअल टैक्सेबल पर्सन सेवाएं जैसे प्रदर्शनियाँ, आयोजन, आदि।


यह मुख्य सेवाओं की सूची है; CBIC से अद्यतन जानकारी के लिए नियमित रूप से जांच करना महत्वपूर्ण है क्योंकि RCM का दायरा बढ़ सकता है।

4. RCM के तहत स्व-इनवॉइस का नमूना प्रारूप

RCM के तहत, यदि आपूर्तिकर्ता पंजीकृत नहीं है तो प्राप्तकर्ता को स्व-इनवॉइस जारी करना होता है। इसका एक सरल प्रारूप निम्नलिखित है:


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उलटा शुल्क प्रणाली (RCM) के तहत स्व-इनवॉइस

वस्त्र/सेवाओं का विवरण

नोट्स:

RCM के तहत देय कुल कर का उल्लेख करें।

स्व-इनवॉइस केवल आंतरिक अनुपालन के लिए होता है (आपूर्तिकर्ता के साथ साझा नहीं किया जाता)।

यह CGST अधिनियम की धारा 31(3)(f) के अनुसार जारी किया जाता है।


Friday, 25 October 2024

GST Update GSTR 9 & 9C for FY 2023-24 is now available for filing

वित्तीय वर्ष (FY) 2023-24 के लिए GSTR-9 और GSTR-9C की फाइलिंग अब उपलब्ध है, और टर्नओवर के आधार पर इसे भरना अनिवार्य है।

1. GSTR-9 – वार्षिक रिटर्न

किसके लिए अनिवार्य: जिन करदाताओं का वार्षिक टर्नओवर ₹2 करोड़ से अधिक है।

उद्देश्य: यह वार्षिक रिटर्न पूरे वर्ष में भरे गए मासिक या त्रैमासिक रिटर्न (GSTR-1 और GSTR-3B) का एक विस्तृत सारांश है। इसमें पूरे वर्ष की बिक्री, खरीद, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC), और अन्य समायोजनों का ब्यौरा होता है।

महत्व: GSTR-9 भरने से करदाता वित्तीय वर्ष में किसी भी त्रुटि या समायोजन की पहचान कर सकते हैं और उन्हें सुधारने का अवसर मिलता है। यह वित्तीय समापन के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिससे खातों की सटीकता सुनिश्चित होती है।


2. GSTR-9C – पुनःमिलान विवरण और ऑडिट

किसके लिए अनिवार्य: जिन करदाताओं का वार्षिक टर्नओवर ₹5 करोड़ से अधिक है। यह सीमा उन व्यवसायों के लिए लागू होती है जिन्हें GST ऑडिट के लिए निर्धारित किया गया है।

उद्देश्य: GSTR-9C एक पुनःमिलान विवरण है, जो यह सुनिश्चित करता है कि GSTR-9 में रिपोर्ट किए गए आंकड़े वित्तीय रिकॉर्ड और खातों की पुस्तकों से मेल खाते हैं। यह प्रक्रिया आंकड़ों की सटीकता के लिए एक अतिरिक्त स्तर की जांच प्रदान करती है।

प्रमाणीकरण: GSTR-9C को  प्रमाणित किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य रिटर्न और वित्तीय रिकॉर्ड के बीच किसी भी अंतर को स्पष्ट करना और इसे ठीक से पुनःमिलान करना है।


GSTR-9 और GSTR-9C की सही और समय पर फाइलिंग न केवल GST कानूनों के अनुपालन को सुनिश्चित करती है, बल्कि दंड से बचाव में भी सहायक होती है। इससे सरकार को करदाताओं की वार्षिक गतिविधियों का सटीक और समग्र विवरण मिलता है, जो प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बढ़ाता है।



Time limit for issuing different income-tax notices and completion of the assessment

यहाँ विभिन्न प्रकार की आयकर नोटिसों के जारी करने और आकलन पूरा करने के समय-सीमा का संक्षिप्त विवरण दिया गया है:

1. धारा 143(2) के तहत नोटिस – स्क्रूटनी आकलन

नोटिस जारी करने की समय सीमा: जिस वित्तीय वर्ष में रिटर्न दाखिल किया गया है, उसके अंत से 3 महीने के भीतर नोटिस जारी किया जाना चाहिए।

आकलन पूरा करने की समय सीमा: धारा 143(3) के तहत आकलन संबंधित आकलन वर्ष के अंत से 9 महीने के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।


2. धारा 148 के तहत नोटिस – पुनःआकलन या आय छूट जाने का आकलन

नोटिस जारी करने की समय सीमा:

यदि छूटी हुई आय ₹50 लाख या उससे कम है: संबंधित आकलन वर्ष के अंत से 3 वर्षों के भीतर नोटिस जारी किया जा सकता है।

यदि छूटी हुई आय ₹50 लाख से अधिक है: संबंधित आकलन वर्ष के अंत से 10 वर्षों के भीतर नोटिस जारी किया जा सकता है।


आकलन पूरा करने की समय सीमा: नोटिस जारी किए गए वित्तीय वर्ष के अंत से 12 महीने के भीतर पुनःआकलन पूरा होना चाहिए।


3. धारा 144 के तहत नोटिस – बेस्ट जजमेंट आकलन

नोटिस जारी करने की समय सीमा: इस धारा के तहत विशेष रूप से नोटिस जारी करने की कोई समय सीमा नहीं है, क्योंकि यह तब लागू होती है जब करदाता रिटर्न दाखिल करने में विफल रहता है या पूछताछ का जवाब नहीं देता।

आकलन पूरा करने की समय सीमा: संबंधित आकलन वर्ष के अंत से 9 महीने के भीतर पूरा होना चाहिए।


4. धारा 148A(d) के तहत नोटिस – धारा 148 के तहत नोटिस जारी करने से पहले जांच करना

नोटिस जारी करने की समय सीमा: यदि असेसिंग अधिकारी को नोटिस जारी करने से पहले जांच करना आवश्यक लगता है, तो वे करदाता को धारा 148A(b) के तहत मौका देते हैं, जो सामान्यतः 1 महीने के भीतर समाप्त हो जाता है।

आकलन पूरा करने की समय सीमा: इसे धारा 148 के तहत नोटिस जारी करने की निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाना अपेक्षित होता है।


5. धारा 153 – आकलन पूरा करने की समय सीमा

धारा 143 के तहत नियमित आकलन या धारा 144 के तहत बेस्ट जजमेंट आकलन: संबंधित आकलन वर्ष के अंत से 9 महीने के भीतर।

धारा 147 के तहत पुनःआकलन: धारा 148 के तहत नोटिस जारी किए गए वित्तीय वर्ष के अंत से 12 महीने के भीतर।

खोज/जब्ती के मामलों में धारा 153A के तहत आकलन: जिसमें खोज का अंतिम प्राधिकरण निष्पादित किया गया हो, उसके वित्तीय वर्ष के अंत से 24 महीने के भीतर।


ये समय-सीमाएं यह सुनिश्चित करती हैं कि आकलन समय पर पूरा हो, और करदाता को उनके आकलन की स्थिति के बारे में स्पष्टता मिल सके। यदि आयकर विभाग इन समय-सीमाओं को पूरा नहीं करता है, तो कार्यवाही अमान्य हो सकती है।



Here’s an overview of the time limits for issuing various income tax notices and completing the assessments in India:

1. Notice under Section 143(2) – Scrutiny Assessment

Time Limit to Issue Notice: Must be issued within 3 months from the end of the financial year in which the return was furnished.

Time Limit for Completion: Assessment under Section 143(3) should be completed within 9 months from the end of the assessment year.


2. Notice under Section 148 – Reassessment or Income Escaping Assessment

Time Limit to Issue Notice:

If the escaped income is less than or equal to ₹50 lakh: Notice can be issued within 3 years from the end of the relevant assessment year.

If the escaped income is more than ₹50 lakh: Notice can be issued within 10 years from the end of the relevant assessment year.


Time Limit for Completion: The reassessment should be completed within 12 months from the end of the financial year in which the notice was served.


3. Notice under Section 144 – Best Judgment Assessment

Time Limit to Issue Notice: This section does not have a specific time limit for issuing the notice, as it applies when the taxpayer fails to file a return or respond to inquiries.

Time Limit for Completion: Should be completed within 9 months from the end of the assessment year.


4. Notice under Section 148A(d) – Conducting Inquiry before Issue of Notice under Section 148

Time Limit to Issue Notice: If the assessing officer believes an inquiry is necessary before issuing a notice under Section 148, they must provide an opportunity to the taxpayer under Section 148A(b), which typically concludes within 1 month.

Time Limit for Completion: Completion is typically expected within the time prescribed for issuing notice under Section 148.


5. Section 153 – Time Limit for Completion of Assessment

Regular Assessment under Section 143 or Best Judgment Assessment under Section 144: 9 months from the end of the assessment year.

Reassessment under Section 147: Within 12 months from the end of the financial year in which the notice under Section 148 was issued.

Assessment in Search/Seizure Cases under Section 153A: Within 24 months from the end of the financial year in which the last of the authorization for search was executed.


These time limits ensure timely assessments and allow the taxpayer to have clarity on their assessment status. If the Income Tax Department misses these timelines, the proceedings may be invalid.


Wednesday, 9 October 2024

*सूचना संख्या 06/2024-सीटी (रेट) का विस्तृत विश्लेषण:* यह सूचना अनरजिस्टर्ड व्यक्तियों द्वारा रजिस्टर्ड व्यक्तियों को धातु स्क्रैप की आपूर्ति को रिवर्स चार्ज मेकेनिज्म (RCM) के तहत लाती है। यह संशोधन पहले की सूचना संख्या 4/2017-सींट्रल टैक्स (रेट) में किया गया है, जो 28 जून 2017 को जारी हुई थी।

 **सूचना संख्या 06/2024-सीटी (रेट) का विस्तृत विश्लेषण:**


यह सूचना अनरजिस्टर्ड व्यक्तियों द्वारा रजिस्टर्ड व्यक्तियों को धातु स्क्रैप की आपूर्ति को रिवर्स चार्ज मेकेनिज्म (RCM) के तहत लाती है। यह संशोधन पहले की सूचना संख्या 4/2017-सींट्रल टैक्स (रेट) में किया गया है, जो 28 जून 2017 को जारी हुई थी।


 मुख्य बिंदु:


1. **नवीनतम संशोधन:**

   - सूचना में एक नया एंट्री नंबर 8 जोड़ा गया है, जो मौजूदा तालिका में क्रमांक 7 के बाद आएगा।


2. **लागू होने वाले अध्याय:**

   - यह संशोधन धातु स्क्रैप के विभिन्न अध्यायों को शामिल करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि सभी प्रकार के धातु स्क्रैप पर रिवर्स चार्ज का नियम लागू होगा।


3. **रिवर्स चार्ज मेकेनिज्म (RCM):**

   - जब कोई अनरजिस्टर्ड व्यक्ति रजिस्टर्ड व्यक्ति को धातु स्क्रैप बेचता है, तो जीएसटी का भुगतान रजिस्टर्ड व्यक्ति को करना होगा।

   - यह प्रक्रिया टैक्स संग्रह में पारदर्शिता बढ़ाती है और अनरजिस्टर्ड विक्रेताओं से होने वाली आपूर्ति पर नियंत्रण रखती है।


4. **उद्देश्य और लाभ:**

   - इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य धातु स्क्रैप के व्यापार को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।

   - यह सुनिश्चित करेगा कि जीएसटी का सही तरीके से पालन हो, और व्यापार में कानून की अनुपालन की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।


5. **व्यापारी और टैक्सपेयर्स के लिए महत्वपूर्ण:**

   - यह सूचना व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन्हें यह स्पष्ट करती है कि धातु स्क्रैप की आपूर्ति के मामले में उनके दायित्व क्या होंगे।


इस प्रकार, यह बदलाव जीएसटी के तहत धातु स्क्रैप के व्यापार को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

New notifications issued to give effect to 54th GSTC recommendations

 New notifications issued to give effect to 54th GSTC recommendations


The CBIC has  issused three (03) notifications i.e.,  Notification No.21, 22 & 23 all dt 08.10.24 and one (01) Rate Notification No:06/2024 (CTR) to give effect to the interest waiver scheme under Sec. 128A, special procedure for rectification of order under 73 , 74 or 107 or 108, waiver of late fees to person liable to deduct TDS under 51 from the month of June 2021 onwards along with RCM liabilities for certain metal scrap supplies.


The key points of the notifications are:


1.Notification No. 21/2024-C.T:


This notification notifies dates up to which tax should be paid for waiver of interest/penalties under section 128A of CGST Act 2017. Accordingly, for most registered persons, the last date is 31.03.2025.

 

For some specific cases, it's 6 months from the date of redetermination order.


2.Notification No. 22/2024-CT:


This notifies a special procedure for rectification of certain specified orders issued under sections 73, 74, 107 or 108 of CGST Act.


This relaxation proceedings applies to all cases where input tax credit ITC was disallowed under Sec. 16(4)  earlier but is now eligible under amended provisions of Section 16(5).


The Registered persons can apply for rectification within 6 months of this notification.


The Proper officer will take a decision on application within 3 months.


3.Notification No. 23/2024-CT:


This Notification Waives  late fee for FORM GSTR-7 (TDS return) from June 2021 onwards.


It also Caps late fee at Rs. 25 per day, subject to maximum of Rs. 1000.


It fully waives late fee for nil TDS months.


All these notifications will come into effect from November 1, 2024.


4.Notification No. 06/2024-CT ( Rate):


This notification brings in the supply of metal scrap by an unregistered person to a registered person under RCM.  It amends the earlier notification No. 4/2017-Central Tax (Rate) from June 28, 2017 by adding a new entry No.8 to the table in the original notification, after S. No. 7. This brings the metal scraps of the following chapters under its ambit.


Chapter 72, 73, 74, 75, 76, 77, 78, 79, 80 or 81


The notification will come into effect on October 10, 2024