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Friday, 9 October 2026

57वीं जीएसटी परिषद बैठक की सिफारिशें

 57वीं जीएसटी परिषद बैठक की सिफारिशें

बैठक: 8 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली | अध्यक्षता: श्रीमती निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त मंत्री | स्रोत: पीआईबी प्रेस विज्ञप्ति (रिलीज़ आईडी 2320934)
1. पृष्ठभूमि और अवलोकन
56वीं जीएसटी परिषद बैठक (2025) का फोकस दरों के युक्तिकरण और दरों में कमी (नेक्स्ट-जेन जीएसटी सुधार) पर था। 57वीं बैठक प्रक्रिया सुधारों पर केंद्रित है: पंजीकरण, रिटर्न, रिफंड और न्याय-निर्णयन। साथ ही कुछ वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी की प्रयोज्यता पर स्पष्टीकरण और व्यापार सुगमता के उपाय भी शामिल हैं। संदेह दूर करने के लिए एफएक्यू जारी किए जा रहे हैं।
उपस्थित प्रतिभागी: दिल्ली, गोवा, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और मेघालय के मुख्यमंत्री; मणिपुर और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री; विधानमंडल वाले राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्री और वरिष्ठ सदस्य; राजस्व सचिव; सीबीआईसी के अध्यक्ष और सदस्य; वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी।
मुख्य सिफारिशें (पीआईबी के अनुसार):
• जीएसटी में गिरफ्तारी के प्रावधान हटाना (सीजीएसटी अधिनियम की धारा 69 का लोप)
• अभियोजन की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़
• सामान्य जुर्माना (धारा 125) ₹25,000 से घटाकर ₹10,000
• इनपुट टैक्स क्रेडिट और रिफंड की व्यापक पात्रता; तेज़, सिस्टम-आधारित रिफंड
• पंजीकरण और अनुपालन का सरलीकरण; ई-कॉमर्स पर छोटे विक्रेताओं के लिए सरल पंजीकरण
• नोटिस और कार्यवाही के साझा मानक; कारण बताओ नोटिस के लिए ₹10,000 की न्यूनतम सीमा
• राज्यों के बीच माल की सुगम आवाजाही; खुफिया सूचना और प्राधिकरण पर आधारित वाहन रोकथाम
• सेवाओं के निर्यात को सुगम बनाने के उपाय
• ₹5 करोड़ तक टर्नओवर वाले छोटे उपभोक्ता-केंद्रित (B2C) कारोबारों के लिए वैकल्पिक एआरक्यूपी योजना को सैद्धांतिक मंज़ूरी
महत्वपूर्ण सावधानी: विज्ञप्ति स्वयं कहती है कि ये केवल सिफारिशें हैं, जिन्हें सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। ये तभी प्रभावी होंगी जब संबंधित परिपत्रों, अधिसूचनाओं और कानूनी संशोधनों के माध्यम से लागू की जाएँगी, जिन्हीं में कानूनी बल है। सीजीएसटी/आईजीएसटी अधिनियम और नियमों में संशोधन आवश्यक होंगे, इसलिए प्रत्येक बिंदु की प्रभावी तिथि अलग से देखनी होगी।
2. भाग क: प्रक्रिया सुधार
क1. पंजीकरण संबंधी सुधार
बिंदु 1: पंजीकरण प्रक्रिया का सुव्यवस्थित होना
पृष्ठभूमि: 56वीं बैठक की सिफारिशों के बाद, सीजीएसटी नियमों के नियम 14ए के तहत पोर्टल द्वारा स्वचालित पंजीकरण (अधिकारी के हस्तक्षेप के बिना) दिया जा रहा है, जहाँ आवेदक प्रति माह ₹2.5 लाख से अधिक आईटीसी आगे नहीं देना चाहता।
शेष मामलों के लिए सिफारिशें:
1. पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज़ों और जानकारी को बताने वाला एक व्यापक परिपत्र, साथ में एफएक्यू।
2. फॉर्म जीएसटी REG-01 में संशोधन, जिसमें निर्धारित दस्तावेज़ों/जानकारी के चयन के लिए ड्रॉप-बॉक्स हों, ताकि करदाता और अधिकारी दोनों को स्पष्टता रहे।
3. जीएसटी पोर्टल पर उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफ़ेस: स्पष्ट नेविगेशन, ड्रॉप-डाउन सूची, टूल-टिप और संदर्भित मार्गदर्शन।
अपेक्षित लाभ: गलत या अधूरी जानकारी के कारण होने वाले अस्वीकरण और प्रश्नों में कमी; अधिकारियों द्वारा तेज़ प्रसंस्करण।
चर्चा के बिंदु:
• पंजीकरण में प्रश्न और अस्वीकृतियाँ (REG-03/REG-05 चरण) अक्सर परेशानी का कारण रही हैं। दस्तावेज़ों की निर्धारित सूची से अधिकारियों की मनमानी माँगें घटनी चाहिए।
• परिपत्र की सामग्री पर नज़र रखें, क्योंकि यही आगे पंजीकरण विवादों का मानक बनेगा।
बिंदु 2: पंजीकरण में संशोधन की प्रक्रिया का युक्तिकरण (नियम 19)
• व्यवसाय के प्रमुख स्थान (PPoB) से संबंधित संशोधनों को छोड़कर, पंजीकरण के सभी विवरणों के संशोधन पोर्टल पर स्वतः स्वीकार होंगे।
• नियम 14ए (स्वचालित मार्ग) के तहत पंजीकृत करदाताओं के लिए PPoB सहित सभी विवरणों के संशोधन स्वतः स्वीकार होंगे।
लाभ: अधिकारी के हस्तक्षेप के बिना लगभग वास्तविक समय में पंजीकरण विवरण का अद्यतन।
चर्चा के बिंदु: सामान्य करदाताओं के लिए PPoB बदलने में अब भी अधिकारी की जाँच रहेगी, यानी शेल-इकाई संबंधी चिंता इसी क्षेत्र में बनी रहेगी। पंजीकरण के समय सही मार्ग (14ए या सामान्य) चुनना ज़रूरी है।
बिंदु 3: पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया का युक्तिकरण
इसके लिए सीजीएसटी अधिनियम और नियमों में संशोधन प्रस्तावित हैं।
3.1.1 करदाता के आवेदन पर स्वचालित रद्दीकरण (फॉर्म जीएसटी REG-16)
चरण 1: सभी लंबित रिटर्न दाखिल होने और सभी बकाया चुकाने के बाद आवेदन सिस्टम द्वारा स्वतः स्वीकार होगा, इन मामलों में:
1. करदाता ने पंजीकरण के बाद किसी भी महीने में ₹2.5 लाख से अधिक आईटीसी आगे नहीं दिया; या
2. करदाता ने किसी महीने में ₹2.5 लाख से अधिक आईटीसी दिया, लेकिन निर्धारित समय में फॉर्म GSTR-10 में अंतिम रिटर्न दाखिल कर दिया।
चरण 2: रद्दीकरण के सभी आवेदन, लंबित रिटर्न दाखिल होने और बकाया चुकाने के बाद, सिस्टम द्वारा स्वतः स्वीकार होंगे। REG-16 में संशोधन होगा ताकि GSTR-10 का विवरण उसी आवेदन में दिया जा सके।
3.1.2 विभाग द्वारा स्वतः संज्ञान से रद्दीकरण
1. नियम 21 में संशोधन कर अधिकारियों द्वारा रद्दीकरण के कुछ आधार हटाना।
2. नियम 21ए और 22 में संशोधन तथा नियम 23ए का समावेश, जिससे रिटर्न दाखिल न करने या बैंक खाते का विवरण न देने जैसी चूक और निर्धारित समय में उसके अनुपालन के आधार पर सिस्टम-आधारित रद्दीकरण और निरस्तीकरण (रिवोकेशन) का तंत्र बने।
लाभ: रद्दीकरण सरल और तेज़, अधिकारियों से संपर्क कम, और प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता।
चर्चा के बिंदु:
• सिस्टम-आधारित रद्दीकरण और निरस्तीकरण से मनमाने रद्दीकरण और निरस्तीकरण की समय-सीमा संबंधी मुकदमेबाज़ी घट सकती है।
• निष्क्रिय पंजीकरण वाले ग्राहकों को अभी रिटर्न और बकाया निपटाने की सलाह दें, ताकि चरण 1/चरण 2 के तहत रद्दीकरण सरल रहे।
• नियम 21 से हटाए जाने वाले आधारों की सूची महत्वपूर्ण होगी; अधिसूचना में जाँचें।
बिंदु 4: ई-कॉमर्स ऑपरेटर (ईसीओ) प्लेटफ़ॉर्म पर छोटे विक्रेताओं के लिए सरल पंजीकरण
• 56वीं बैठक में सैद्धांतिक मंज़ूरी दी गई थी; 57वीं बैठक ने सीजीएसटी नियमों में नियम 14बी जोड़ने की सिफारिश की है।
• यह उन छोटे वस्तु-आपूर्तिकर्ताओं पर लागू है जो ईसीओ के माध्यम से उन राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में आपूर्ति करते हैं जहाँ उनकी भौतिक उपस्थिति नहीं है, और जो प्रति माह ₹2.5 लाख से अधिक आईटीसी आगे नहीं देना चाहते (विभिन्न व्यक्तियों के बीच स्टॉक हस्तांतरण को छोड़कर)।
• आपूर्तिकर्ता उस राज्य में ईसीओ के गोदाम को अपना PPoB घोषित कर सकता है।
• कुछ शर्तों के साथ पंजीकरण सिस्टम द्वारा स्वतः दिया जाएगा।
लाभ: छोटे विक्रेता हर राज्य में व्यवसाय स्थल बनाए बिना अन्य राज्यों में कारोबार बढ़ा सकेंगे; कारोबार करने में आसानी को बड़ा बढ़ावा।
चर्चा के बिंदु: नियम 14बी की शर्तें (अधिसूचित होनी हैं) तय करेंगी कि कितने विक्रेता इसका उपयोग कर पाएँगे। व्यवसाय स्थल पर आधारित अधिकार-क्षेत्र, निर्धारण और नोटिस के साथ इसका संबंध भी देखना होगा।
क2. रिटर्न संबंधी सुधार
बिंदु 5: रिटर्न में देयता और आईटीसी में संशोधन का वैकल्पिक तंत्र
उद्देश्य: देयता और आईटीसी में बेमेल को न्यूनतम करना, तथा इनसे उत्पन्न नोटिस/सूचनाओं को घटाना।
अनुशंसित उपाय:
1. GSTR-1/1A/IFF में सुधार, ताकि इनका GSTR-3B से बेहतर मिलान हो सके।
2. नियम 86डी (नया): "रिवर्स चार्ज पर चुकाए कर और दावा किए गए आईटीसी का इलेक्ट्रॉनिक विवरण", जिससे आरसीएम की देयता और आईटीसी की सही रिपोर्टिंग हो।
3. नियम 61(1ए) (नया): देयता की सही रिपोर्टिंग और सुधार का तंत्र, ताकि GSTR-3B की देयता GSTR-1/1A/IFF से मेल खाए।
4. फॉर्म जीएसटी DRC-03 में संशोधन, ताकि भुगतान किस मूल चालान के लिए है, उसका विवरण घोषित हो सके।
5. नियम 60(6ए) (नया): इनवॉइस मैनेजमेंट सिस्टम (IMS) को वैधानिक आधार: प्राप्तकर्ता GSTR-2B बनाने के लिए आवक आपूर्ति के दस्तावेज़ को स्वीकार, अस्वीकार या लंबित रख सकेगा, कुछ शर्तों के साथ, जिनमें क्रेडिट नोट को लंबित रखने की अवधि भी शामिल है।
6. नियम 86सी (नया): "इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट रिवर्सल और रीक्लेम विवरण", ताकि GSTR-3B में उलटे गए और पुनः दावा किए गए आईटीसी की सही रिपोर्टिंग हो।
7. नियम 61(1बी) (नया): आईटीसी की सही रिपोर्टिंग और सुधार का तंत्र, ताकि GSTR-3B में लिया गया आईटीसी GSTR-2B से मेल खाए।
8. IMS, रिवर्सल और रीक्लेम विवरण तथा आरसीएम विवरण के संदर्भ में GSTR-3B में आईटीसी और उसके उत्क्रमण की सही जानकारी भरने के तरीके पर स्पष्टीकरण हेतु परिपत्र।
समय-सीमा: अप्रैल 2027 के रिटर्न से लागू करने का प्रस्ताव।
परामर्श: संशोधित तंत्र को समयबद्ध परामर्श के लिए सार्वजनिक डोमेन में रखा जाएगा; हितधारकों की प्रतिक्रिया के आधार पर आवश्यक बदलावों को मंज़ूरी देने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री को अधिकृत किया गया है।
चर्चा के बिंदु:
• यह GSTR-3B में सुधार के तरीके में बड़ा बदलाव है। अभी त्रुटियाँ प्रायः अगले महीने के रिटर्न या DRC-03 से सुधारी जाती हैं; संरचित सुधार सुविधा स्वागत योग्य है।
• रिटर्न-अनुपालन टीमों को IMS में अनुशासन (स्वीकार/अस्वीकार/लंबित) और नए विवरणों (86सी, 86डी) के लिए तैयार रहना होगा।
• तारीख अप्रैल 2027 है, इसलिए परामर्श अवधि में सुझाव भेजने का समय है.
क3. रिफंड संबंधी सुधार
बिंदु 6: रिफंड की तेज़, सिस्टम-आधारित स्वचालित प्रक्रिया
इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में अतिरिक्त शेष, शून्य-दर आपूर्ति और उलटे शुल्क ढाँचे (इन्वर्टेड ड्यूटी) के रिफंड के लिए धारा 54 और नियमों में दो चरणों में संशोधन की सिफारिश की गई है।
चरण 1
1. इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में अतिरिक्त शेष का पूरा रिफंड बिना अधिकारी के हस्तक्षेप के सिस्टम द्वारा स्वतः स्वीकृत होगा।
2. पावती या कमी ज्ञापन (डेफिशिएंसी मेमो) जारी करने की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन; 10 दिन में जारी न होने पर सिस्टम द्वारा मानित पावती।
3. शून्य-दर आपूर्ति और उलटे शुल्क ढाँचे के दावों में सिस्टम के जोखिम-मूल्यांकन के आधार पर दावा की गई राशि का 90% अनंतिम रूप से स्वतः स्वीकृत।
चरण 2
1. सिस्टम द्वारा आवेदन के सत्यापन के बाद स्वचालित पावती।
2. पावती वाले मामलों में, शून्य-दर आपूर्ति के दावों का पूरा रिफंड लंबित बकाया समायोजित कर, जोखिम-मूल्यांकन के आधार पर स्वतः स्वीकृत।
6.2 अन्य प्रक्रियात्मक संशोधन
1. फॉर्म RFD-01 में विवरण सिस्टम-पठनीय प्रारूप में लिए जाएँगे; शून्य-दर आपूर्ति और उलटे शुल्क ढाँचे के दावों में स्कैन किए दस्तावेज़ अपलोड करने की आवश्यकता नहीं रहेगी।
2. नियम 89(4)(C) में संशोधन: माल की शून्य-दर आपूर्ति के टर्नओवर की उस सीमा को हटाना, जो घरेलू स्तर पर आपूर्ति किए गए समान माल के मूल्य का 1.5 गुना थी।
3. धारा 54(14): स्पष्टीकरण कि ₹1,000 की सीमा कुल रिफंड राशि (सीजीएसटी + एसजीएसटी/यूटीजीएसटी + आईजीएसटी) पर लागू होगी।
6.3 अपील के पूर्व-जमा (प्री-डिपॉज़िट) के रिफंड पर ब्याज
1. धारा 115 में संशोधन कर इसे ऐसे रिफंड पर ब्याज दर के लिए स्वतंत्र प्रावधान बनाना।
2. ब्याज दर संबंधी मुद्दों पर स्पष्टीकरण हेतु परिपत्र।
6.4 लाभ: अधिक स्वचालन, पारदर्शिता, निश्चितता और एकरूपता; नकदी प्रवाह में सुधार; विभाग से संपर्क में कमी।
चर्चा के बिंदु:
• उलटे शुल्क ढाँचे और निर्यात रिफंड में 90% अनंतिम स्वीकृति कार्यशील पूँजी के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये दावे अक्सर महीनों अटके रहते हैं।
• नियम 89(4)(C) की 1.5 गुना सीमा हटने से उन निर्यातकों को लाभ होगा जिनकी निर्यात कीमतें घरेलू कीमतों से अधिक हैं।
• जोखिम-आधारित स्वचालित स्वीकृति में डेटा की एकरूपता (GSTR-1, 3B, ई-इनवॉइस, शिपिंग बिल) निर्णायक होगी; असंगति पर रिफंड की जगह जाँच हो सकती है।
• पूर्व-जमा के रिफंड पर ब्याज की स्पष्टता अपील-स्तर के मुकदमों में सहायक होगी।
क4. विवाद समाधान संबंधी सुधार
बिंदु 7: नोटिस, न्याय-निर्णयन और जुर्माना
7.1 अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश (परिपत्र): माँग नोटिस और न्याय-निर्णयन/अपील आदेशों की गुणवत्ता; समय पर जारी करना; धोखाधड़ी, जानबूझकर गलत विवरण या तथ्य छुपाने का आधार केवल प्रत्येक मामले के गुण-दोष पर लगाना; व्यक्तिगत सुनवाई सहित नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन।
7.2 धारा 73, 74 और 74A में संशोधन
1. कारण बताओ नोटिस जारी करने के लिए ₹10,000 की न्यूनतम सीमा (सीजीएसटी + एसजीएसटी + आईजीएसटी + उपकर)। ₹10,000 से कम कर वाले मामलों में नोटिस जारी नहीं होगा। सीमा लागू होने की तिथि पर लंबित नोटिस और अपीलें, जिनमें राशि ₹10,000 से कम है, ऐसे निपटाई जाएँगी मानो नोटिस जारी होते समय यह सीमा लागू थी।
2. जहाँ पूरा कर, ब्याज और जुर्माना निर्धारित समय में स्वेच्छा से चुका दिया जाए, वहाँ जुर्माने को "प्रभार (चार्ज)" मानना।
3. गैर-धोखाधड़ी मामलों में न्याय-निर्णयन आदेश के 30 दिन (धारा 73) या 60 दिन (धारा 74A) में कर और ब्याज चुकाने पर 5% घटा हुआ जुर्माना।
4. गैर-धोखाधड़ी मामलों में ₹10,000 के न्यूनतम जुर्माने की शर्त हटाना।
7.3 सामान्य जुर्माना (धारा 125): अधिकतम राशि ₹25,000 से घटाकर ₹10,000।
7.4 केवल जुर्माने वाले मामलों में पूर्व-जमा की ऊपरी सीमा: धारा 107(6) (अपीलीय प्राधिकारी) और धारा 112(8) (अपीलीय अधिकरण) के परंतुकों में संशोधन: जहाँ आदेश में केवल जुर्माना है और कर की माँग नहीं, वहाँ पूर्व-जमा की ऊपरी सीमा ₹40 करोड़ (₹20 करोड़ सीजीएसटी + ₹20 करोड़ एसजीएसटी/यूटीजीएसटी)।
चर्चा के बिंदु:
• लंबित छोटे नोटिसों पर इस सीमा का असर बड़ी संख्या में मामले समाप्त कर सकता है। मुवक्किलों के ₹10,000 से कम के लंबित नोटिस देखें।
• गैर-धोखाधड़ी मामलों में 5% घटे जुर्माने का रास्ता समझौते का प्रोत्साहन देता है; अपील का निर्णय लेने से पहले 30/60 दिन की समय-सीमा पर सलाह दें।
• धोखाधड़ी/तथ्य छुपाने के आरोप पर दिशानिर्देश उन नोटिसों को चुनौती देने में मदद कर सकते हैं जहाँ विस्तारित अवधि का आरोप यांत्रिक रूप से लगाया गया।
• ₹10,000 की राशि तीन अलग संदर्भों में आती है (नोटिस की सीमा, सामान्य जुर्माने की सीमा, न्यूनतम जुर्माने की समाप्ति); अंतिम पाठ से मिलान करें।
3. भाग ख: जीएसटी के अन्य प्रमुख सुधार
ख1. इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का निर्बाध प्रवाह
बिंदु 8: पूँजीगत माल और इनपुट सेवाओं पर संचित आईटीसी का रिफंड
• धारा 54(3) के परंतुक के खंड (ii) और नियमों में संशोधन कर संचित आईटीसी का रिफंड देना:
    ◦ शून्य-दर आपूर्ति के रिफंड में पूँजीगत माल पर; और
    ◦ उलटे शुल्क ढाँचे के रिफंड में इनपुट सेवाओं और पूँजीगत माल पर।
• इनपुट सेवाएँ (उलटा शुल्क ढाँचा): 1 नवंबर 2026 या उसके बाद लिए गए आईटीसी पर उपलब्ध।
• पूँजीगत माल (शून्य-दर और उलटा शुल्क ढाँचा): रिफंड 60 महीनों में बँटा होगा, 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद लिए गए आईटीसी पर।
• लाभ: कार्यशील पूँजी की तंगी कम होगी और आईटीसी का अटकना दूर होगा।
चर्चा के बिंदु: पहले उलटे शुल्क ढाँचे में रिफंड के सूत्र में इनपुट सेवाएँ और पूँजीगत माल शामिल नहीं थे। कट-ऑफ तिथियों से पहले लिया गया क्रेडिट लाभ नहीं पाएगा, इसलिए खरीद और आईटीसी के समय की समीक्षा करें। 60 महीने की किस्तें नकदी प्रवाह की योजना को प्रभावित करेंगी।
बिंदु 9: अवरुद्ध क्रेडिट का युक्तिकरण (धारा 17(5))
निम्न आपूर्तियों पर आईटीसी की रोक हटाने का प्रस्ताव (अन्य के साथ):
• बाहरी खानपान (आउटडोर कैटरिंग)
• स्वास्थ्य और जीवन बीमा
• दूरसंचार टावर
• कारखाना परिसर के बाहर बिछाई गई पाइपलाइन
• निःशुल्क नमूने
• कानूनन आवश्यक होने पर शेल्फ-लाइफ समाप्त होने पर नष्ट या बट्टे खाते में डाला गया माल
लाभ: करों का कैस्केडिंग प्रभाव घटेगा; आईटीसी का प्रवाह सुगम होगा।
चर्चा के बिंदु: संशोधित धारा 17(5) का सटीक पाठ, प्रभावी तिथि और शर्तें (जैसे बीमा पर) प्रतीक्षित हैं। विज्ञप्ति में "अन्य के साथ" लिखा है, इसलिए सूची पूर्ण न हो।
ख2. निर्यात / शून्य-दर आपूर्ति
बिंदु 10: सेवाओं का निर्यात और संबंधित उपाय
1. आईजीएसटी अधिनियम की धारा 2(6) के उप-खंड (v) का लोप: सेवाओं के "निर्यात" के लिए यह शर्त हटाना कि आपूर्तिकर्ता और प्राप्तकर्ता एक ही व्यक्ति के अलग-अलग प्रतिष्ठान न हों। इससे विदेशी कार्यालयों/शाखाओं के साथ या उनके माध्यम से दी गई सेवाओं पर रिफंड आसान होगा।
2. विदेशी मुद्रा या (अनुमत होने पर) भारतीय रुपये में भुगतान की प्राप्ति से जुड़े मुद्दों पर माल और सेवाओं के निर्यात के लिए परिपत्र।
3. आईजीएसटी अधिनियम की धारा 13(3)(a) का लोप: जहाँ प्राप्तकर्ता आपूर्तिकर्ता को माल भौतिक रूप से उपलब्ध कराता है, वहाँ सेवाओं का आपूर्ति स्थान धारा 13(2) के सामान्य नियम, यानी प्राप्तकर्ता के स्थान से तय होगा। इससे विदेशी प्राप्तकर्ताओं को ऐसी सेवाएँ देने वाले भारतीय प्रदाताओं को निर्यात लाभ मिलेंगे।
4. आईजीएसटी अधिनियम की धारा 16(1) में स्पष्टीकरण: यदि माल विदेशी खरीदार को बेचा जाए पर उसकी डिलीवरी एसईजेड/एफटीडब्ल्यूजेड में हो, और भुगतान परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा (या आरबीआई की अनुमति पर भारतीय रुपये) में मिले, तो इसे एसईजेड/एफटीडब्ल्यूजेड को आपूर्ति माना जाएगा, जिससे भारतीय विनिर्माताओं को शून्य-दर के लाभ की निश्चितता मिलेगी।
चर्चा के बिंदु: मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) सेवाएँ, शाखा कार्यालय की सेवाएँ और विदेशी प्रधान के लिए जॉब-वर्क जैसी सेवाएँ मुकदमेबाज़ी का बड़ा क्षेत्र रही हैं। ये संशोधन कई विवाद सुलझा सकते हैं, पर प्रभावी तिथि और यह कि वे स्पष्टीकरणात्मक हैं या भावी, देखना होगा।
ख3. कारोबार में सुगमता
बिंदु 11: गिरफ्तारी और अभियोजन
11.1 सीजीएसटी अधिनियम की धारा 69 का लोप कर जीएसटी के तहत गिरफ्तारी की शक्तियाँ पूरी तरह वापस लेना।
11.2 अन्य उपाय (धोखाधड़ी और कर-चोरी के विरुद्ध प्रभावी निरोध बनाए रखते हुए):
1. अभियोजन की मौद्रिक सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़।
2. धारा 132(1):
    ◦ खंड (i) का लोप
    ◦ खंड (e) में "कर की चोरी करता है" शब्द हटाना
    ◦ खंड (h) में "या किसी अन्य तरीके से व्यवहार करता है" शब्द हटाना
3. धारा 132(1)(c): संशोधन ताकि यह केवल माल/सेवा प्राप्त किए बिना या बिना बीजक/बिल के आईटीसी के कपटपूर्ण लाभ को कवर करे।
4. धारा 132 के तहत विभिन्न अपराधों की सज़ा का युक्तिकरण।
चर्चा के बिंदु:
• धारा 69 का लोप ऐतिहासिक बदलाव है। ध्यान रहे कि अभियोजन (धारा 132) जारी रहेगा, केवल गिरफ्तारी की शक्ति हटेगी। धारा 70 (समन), तलाशी और ज़ब्ती तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों से इसके संबंध को संशोधन का पाठ आने पर देखें।
• खंड (c) का संकुचन तकनीकी/समय संबंधी चूक से लिए गए आईटीसी और वास्तविक फर्जी/बिना-बीजक आईटीसी के बीच भेद के लिए महत्वपूर्ण है।
• गिरफ्तारी से जुड़े लंबित मुकदमे (जमानत, अग्रिम जमानत, बंदी प्रत्यक्षीकरण) प्रभावित हो सकते हैं; संक्रमणकालीन स्थिति निर्णायक होगी।
बिंदु 12: ई-वे बिल, वाहन रोकथाम और निरोध
धारा 68, 129 और 130 में संशोधन:
1. वाहन को केवल विशिष्ट खुफिया सूचना पर और संयुक्त आयुक्त से कम न हों ऐसे अधिकारी के प्राधिकार से रोका जा सकेगा।
2. निरीक्षण, निरोध या ज़ब्ती तभी जब आपूर्तिकर्ता या प्राप्तकर्ता उस राज्य में स्थित/पंजीकृत हो जहाँ वाहन रोका गया हो। पारगमन (ट्रांज़िट) राज्यों में कोई रोकथाम नहीं।
3. जहाँ ई-वे बिल नहीं बना है, या वाहन के पास माल के मूल/गंतव्य दर्शाने वाला कोई दस्तावेज़ नहीं है, वहाँ माल का निरीक्षण, निरोध या ज़ब्ती अधिकार-क्षेत्र की परवाह किए बिना हो सकेगी।
4. धारा 130 के तहत ज़ब्त-कुर्की (कन्फिस्केशन) पारगमन में माल/वाहनों पर लागू नहीं होगी।
लाभ: माल और वाहनों की सुगम आवाजाही; परिवहन दक्षता में सुधार।
चर्चा के बिंदु: इससे सड़क पर होने वाली मनमानी रोकथाम पर अंकुश लगेगा, जो निरोध-विवादों की बड़ी वजह रही है। परिवहनकर्ता और कारोबारी दस्तावेज़ पूरे रखें, क्योंकि ई-वे बिल या दस्तावेज़ के बिना आवाजाही को यह राहत नहीं बचाएगी।
बिंदु 13: बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) में स्वत्व का हस्तांतरण
सीजीएसटी अधिनियम की अनुसूची II में संशोधन: आईपीआर में स्वत्व का हस्तांतरण, अस्थायी हो या स्थायी, एकसमान रूप से सेवा की आपूर्ति माना जाएगा। इससे अनुपालन आसान होगा और आईपीआर से जुड़े सीमा-पार लेन-देन सुगम होंगे।
बिंदु 14: नियम 86A: सुनवाई का अवसर
नियम 86A में संशोधन: इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में किसी राशि को अवरुद्ध करने के विरुद्ध करदाता को आपत्ति दाखिल करने और संबंधित अधिकारी द्वारा निर्णय लेने से पहले व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर।
चर्चा के बिंदु: क्रेडिट लेजर ब्लॉक करने पर नोटिस और कारण के अभाव को लेकर अनेक रिट याचिकाएँ दाखिल हुई हैं। औपचारिक आपत्ति और सुनवाई की प्रक्रिया बड़ा प्रक्रियात्मक सुरक्षा-कवच है।
बिंदु 15: छोटे करदाताओं को विलंब शुल्क में राहत
पिछले वित्त वर्ष में ₹5 करोड़ तक वार्षिक टर्नओवर वाले करदाताओं के लिए धारा 39(1) के तहत विलंब से रिटर्न दाखिल करने पर विलंब शुल्क की माफ़ी, यदि विलंबित रिटर्न देय तिथि वाले माह के अंत तक दाखिल कर दिया जाए।
चर्चा का बिंदु: माफ़ी केवल विलंब शुल्क की है, देर से चुकाए गए कर पर ब्याज की नहीं। माह-अंत की यह खिड़की मुवक्किलों के अनुपालन कैलेंडर में रखें।
बिंदु 16: परिपत्रों के माध्यम से स्पष्टीकरण
क्षेत्रीय कार्यालयों की भिन्न व्याख्याओं से उपजी अस्पष्टता दूर करने के लिए निम्न विषयों पर परिपत्र जारी होंगे:
1. इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर (आईएसडी) तंत्र द्वारा इनपुट सेवा क्रेडिट का वितरण।
2. धारा 17(4) चुनने वाली बैंकिंग कंपनियों, वित्तीय संस्थाओं और एनबीएफसी द्वारा आईटीसी का लाभ।
3. पूर्व-जमा के भुगतान से जुड़े विभिन्न मुद्दे।
4. कुछ स्थितियों में प्रदर्शन (डेमो) वाहनों पर आईटीसी की स्वीकार्यता।
5. सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार नियम 96(10) का 23.10.2017 से प्रभावी लोप।
चर्चा का बिंदु: 23.10.2017 से नियम 96(10) के लोप का पूर्वव्यापी प्रभाव उन रिफंड दावों और नोटिसों के लिए प्रासंगिक है जो उस नियम के तहत अस्वीकृत या जारी हुए थे।
बिंदु 17: वैकल्पिक वार्षिक रिटर्न तिमाही भुगतान (एआरक्यूपी) योजना
परिषद ने पिछले वित्त वर्ष में ₹5 करोड़ तक के समग्र टर्नओवर वाले और केवल अपंजीकृत व्यक्तियों को आपूर्ति (B2C) करने वाले करदाताओं के लिए वैकल्पिक एआरक्यूपी योजना की अवधारणा-पत्र (कॉन्सेप्ट नोट) को सैद्धांतिक मंजूरी दी।
चर्चा के बिंदु: यह केवल कॉन्सेप्ट नोट की सैद्धांतिक मंजूरी है। योजना के ब्योरे (भुगतान की प्रक्रिया, आईटीसी का व्यवहार, वार्षिक रिटर्न का ढाँचा, पात्रता से बाहर श्रेणियाँ) आने बाकी हैं। छोटे खुदरा विक्रेता, रेस्तराँ आदि उपभोक्ता-केंद्रित कारोबार संभावित लाभार्थी हैं।
बिंदु 18: अनुपालन को सुव्यवस्थित करने के अन्य उपाय
1. धारा 16, 37 और 39 में संशोधन: धारा 37 (बाह्य आपूर्ति विवरण) और धारा 39 (रिटर्न) की समय-सीमाओं को धारा 16(4) के आईटीसी की समय-सीमा के अनुरूप करना।
2. धारा 9(5): अपनाए गए कारोबारी मॉडल की परवाह किए बिना अधिसूचित सेवाओं पर कर चुकाने की ईसीओ की देयता पर स्पष्टता।
3. सीजीएसटी अधिनियम में सत्यापन खंड (वैलिडेशन क्लॉज़): उन नोटिसों को मान्य करने के लिए जिन्हें अदालतों ने कई वित्तीय वर्षों के लिए एक साथ जारी होने के आधार पर अमान्य ठहराया।
4. ₹5 करोड़ और उससे अधिक वार्षिक समग्र टर्नओवर वाले करदाताओं के लिए ई-इनवॉइसिंग का विस्तार: (क) अपंजीकृत व्यक्ति से घरेलू आपूर्ति जहाँ रिवर्स चार्ज (आरसीएम) पर कर देय है, और (ख) सेवाओं के आयात पर।
चर्चा के बिंदु:
• सत्यापन खंड (मद 3) सीधे उन अनेक नोटिसों को प्रभावित करता है जिन्हें उच्च न्यायालयों ने बहु-वर्षीय होने के कारण रद्द किया। इसकी संवैधानिक वैधता और लंबित रिट/अपीलों पर प्रभाव पर बारीक नज़र रखनी होगी।
• आरसीएम और सेवाओं के आयात के लिए ई-इनवॉइसिंग से ₹5 करोड़ या अधिक वाले करदाताओं को ईआरपी और प्रक्रियाओं में बदलाव करना होगा।
• धारा 37/39 को धारा 16(4) से जोड़ने का उद्देश्य रिटर्न की देय तिथियों और आईटीसी की कट-ऑफ तिथि के बीच असंगति दूर करना है।
बिंदु 19: जीएसटी अपीलीय अधिकरण (जीएसटीएटी) का संरेखण
सीजीएसटी अधिनियम और जीएसटीएटी (अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति और सेवा शर्तें) नियम, 2023 में संशोधन, ताकि जीएसटी अपीलीय अधिकरण के प्रावधान अधिकरण सुधार अधिनियम, 2026 और राष्ट्रीय अधिकरण आयोग तथा अधिकरणों के अध्यक्षों/सदस्यों की अर्हता, चयन और सेवा शर्तें नियम, 2026 के अनुरूप हों।
4. भाग ग: जीएसटी दरों में बदलाव और स्पष्टीकरण
ग1. माल
क्र.
मद
सिफारिश
1
सब्लिमेशन पेपर
शीर्ष 4809 में वर्गीकृत होने का स्पष्टीकरण; पिछले मामले "जैसा है जहाँ है" आधार पर नियमित।
2
खिलौने
दर-अनुसूचियों की प्रविष्टियाँ शीर्ष 9503 के सभी खिलौनों (गुड़िया, पज़ल आदि) को कवर करती हैं, केवल तिपहिया, स्कूटर और पैडल कार को नहीं (अधिसूचना 09/2025-CTR दिनांक 17.09.2025 की अनुसूची I का क्र. 497 और अनुसूची II का क्र. 616)।
3
समुद्री शैवाल (सीवीड) अर्क आधारित बायो-स्टिमुलेंट
यदि उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 की अनुसूची VI में पंजीकृत हों तो उर्वरक के रूप में शीर्ष 3101 में वर्गीकृत; पिछले मामले "जैसा है जहाँ है" आधार पर नियमित (अनुसूची I के क्र. 237 में व्याख्या जोड़ी जाएगी)।
4
पुराने वाहन (मार्जिन स्कीम)
विक्रेता अन्य इनपुट और इनपुट सेवाओं (पुर्ज़े, मरम्मत, तकनीकी सेवाएँ, किराया, विपणन, विज्ञापन आदि) पर आईटीसी ले सकते हैं। प्रतिबंध केवल खरीदे गए पुराने वाहनों पर चुकाए कर पर लागू है।
5
अपशिष्ट और कबाड़ (प्लास्टिक, ई-कचरा, टायर, इस्तेमाल किया गया खाने का तेल)
अपंजीकृत से पंजीकृत व्यक्ति को आपूर्ति पर आरसीएम लागू; आपूर्तिकर्ता सीमा पार करने पर पंजीकरण कराए; आपूर्तिकर्ता सीमा से नीचे हो तब भी प्राप्तकर्ता आरसीएम चुकाए। पंजीकृत से पंजीकृत (B2B) आपूर्ति पर 2% टीडीएस लागू।
6
सायलियम बीज (इसबगोल)
ताज़ा, ठंडा, जमा हुआ या सूखा, किसी भी रूप में शून्य (NIL) दर।
7
रीट्रेडेड ट्रैक्टर टायर
दर को नए ट्रैक्टर टायरों के अनुरूप करना।
8
सीएसडी/यूआरसी की आपूर्ति पर क्षतिपूर्ति उपकर
जहाँ उपकर नहीं लगाया गया, वहाँ छूट: सीएसडी द्वारा दो/चार पहिया वाहनों पर (01.07.2017 से 30.09.2022); सीएसडी और यूनिट रन कैंटीन द्वारा वातित पेय पर (01.07.2017 से 31.03.2022)।
चर्चा के बिंदु: चुनिंदा कबाड़ पर आरसीएम और 2% टीडीएस से रीसाइक्लर और विनिर्माताओं पर अनुपालन का भार (पंजीकरण, कटौती, जमा, रिटर्न में रिपोर्टिंग) बढ़ेगा। "जैसा है जहाँ है" नियमितीकरण का अर्थ है पिछली अवधि के लिए न रिफंड, न माँग।
ग2. सेवाएँ
क्र.
सेवा
सिफारिश
1
इलेक्ट्रिक वाहन से यात्री परिवहन और चालक सहित मोटर वाहन किराया
जहाँ बैटरी चार्जिंग की लागत प्रतिफल में शामिल हो, वहाँ सीमित आईटीसी के साथ 5% जीएसटी चुकाने का विकल्प।
2
ईसीओ के माध्यम से डिलीवरी सेवाएँ
(क) जहाँ सेवा देने वाला धारा 22(1) में पंजीकरण के लिए बाध्य नहीं, वहाँ कूरियर/डाक के अलावा डिलीवरी सेवाओं को धारा 9(5) में लाना, बिना आईटीसी 5% दर पर; (ख) ईसीओ के माध्यम से बेचे/मँगाए माल की डिलीवरी सेवाओं पर बिना आईटीसी 5%; (ग) ईसीओ के माध्यम से बेचे/मँगाए माल के लिए जीटीए द्वारा अपंजीकृत व्यक्तियों को माल परिवहन पर अधिसूचना 12/2017-CT(R) की प्रविष्टि 21A की छूट हटाना।
3
मोटर वाहन पट्टा (लीज़िंग)
पट्टादाता द्वारा वहन किए गए और पट्टाग्राही से वसूले गए पंजीकरण शुल्क, रोड टैक्स, बीमा और फास्टैग शुल्क जैसी वैधानिक/सहायक वसूलियों के जीएसटी व्यवहार पर स्पष्टीकरण।
4
एक ही कारोबार-श्रेणी में आईटीसी
रेस्तराँ/बाहरी खानपान, ₹7,500 प्रति इकाई प्रति दिन तक होटल आवास और जिम/फिटनेस सेवाओं पर सीमित आईटीसी, जैसे यात्री परिवहन, टूर ऑपरेटर और मोटर वाहन किराया सेवाओं में पहले से उपलब्ध है।
5
हेलीकॉप्टर से यात्री परिवहन
पूर्वोत्तर राज्यों, सिक्किम और बागडोगरा (पश्चिम बंगाल) के हवाई अड्डों/हेलीपैड से/तक सीट-साझा आधार पर यात्री परिवहन जीएसटी से मुक्त।
6
बुवाई के बीजों का भंडारण/वेयरहाउसिंग
जीएसटी से मुक्त।
7
कॉफ़ी की क्योरिंग
कॉफ़ी क्योरर द्वारा उत्पादकों को दी जाने वाली कृषि सहायता सेवा मुक्त।
8
सीमेन्स प्रॉविडेंट फंड संगठन (एसपीएफओ)
सीमेन्स प्रॉविडेंट फंड अधिनियम, 1966 से शासित व्यक्तियों को एसपीएफओ की सेवाएँ मुक्त।
9
अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) सेवाएँ
अधिसूचना 12/2017-CT(R) की प्रविष्टि 44A के तहत छूट की पात्रता के लिए संस्था प्रमुख द्वारा स्व-प्रमाणन कि गतिविधि अनुसंधान एवं विकास है, परामर्श नहीं।
10
विदेशी शिपिंग लाइनों के भारतीय प्रतिष्ठानों द्वारा सेवाओं का आयात
संबंधित व्यक्ति/भारत के बाहर के प्रतिष्ठान से बिना प्रतिफल लिए गए आयात पर छूट; पिछली अवधि "जैसा है जहाँ है" आधार पर नियमित।
11
टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (टीओटी) मॉडल में एनएचएआई को अग्रिम/रियायत राशि
राजमार्ग परियोजनाओं में टोल वसूलने के लिए सरकार/स्थानीय प्राधिकरण द्वारा रियायतग्राही को विशेष अधिकार, लाइसेंस और प्राधिकार देने की सेवा मुक्त।
12
टीओटी राजमार्ग परियोजनाओं में संचालन एवं रखरखाव (ओ एंड एम) सेवाएँ
रियायतग्राही द्वारा रियायत-प्राधिकारी को दी जाने वाली ओ एंड एम सेवाओं पर मूल्यांकन और जीएसटी भुगतान के समय के लिए विशेष प्रक्रिया।
13
बैंकों में फंड ट्रांसफर प्राइसिंग
मुख्यालय द्वारा शाखाओं के बीच धन के काल्पनिक हस्तांतरण में बही में "ब्याज" माना गया काल्पनिक अंश अधिसूचना 12/2017-CT(R) में दी गई "ब्याज" की परिभाषा में आता है, यह स्पष्टीकरण।
चर्चा के बिंदु:
• एक ही कारोबार-श्रेणी में आईटीसी (मद 4) धारा 17(5) के अवरुद्ध क्रेडिट को आंशिक रूप से हल्का करता है; बिंदु 9 के संशोधन के साथ इसे मिलाकर पढ़ना होगा।
• ईसीओ डिलीवरी सेवाओं पर बिना आईटीसी 5% दर गिग/डिलीवरी साझेदारों की सेवाओं को कर के दायरे में लाती है और ईसीओ से जुड़ी डिलीवरी के लिए जीटीए छूट वापस लेती है।
• ईवी परिवहन का विकल्प (मद 1) वैकल्पिक है और आईटीसी सीमित है; संचालक दोनों दरों से गणना करें।
5. समय-सीमा एक नज़र में
मद
तिथि / चरण
इनपुट सेवाओं (उलटा शुल्क ढाँचा) पर आईटीसी का रिफंड
1 नवंबर 2026 या उसके बाद लिए गए आईटीसी पर
पूँजीगत माल पर आईटीसी का रिफंड (60 महीने में बँटा)
1 अप्रैल 2027 या उसके बाद लिए गए आईटीसी पर
रिटर्न में देयता/आईटीसी सुधारने का वैकल्पिक तंत्र
सार्वजनिक परामर्श के बाद अप्रैल 2027 के रिटर्न से
पंजीकरण का स्वचालित रद्दीकरण
चरण 1, फिर चरण 2
स्वचालित रिफंड प्रक्रिया
चरण 1, फिर चरण 2
नियम 96(10) का लोप
23.10.2017 से प्रभावी
अन्य सभी मद
अधिसूचना/संशोधन द्वारा तय होने वाली प्रभावी तिथि
6. मुवक्किलों और प्रैक्टिस के लिए व्यावहारिक कार्य-बिंदु
1. पंजीकरण: निष्क्रिय पंजीकरणों के रिटर्न और बकाया निपटाएँ, ताकि स्वचालित रद्दीकरण सुगम रहे। नियम 14ए और 14बी मार्ग की पात्रता देखें।
2. रिटर्न: अप्रैल 2027 से पहले IMS अनुशासन और मिलान प्रक्रिया की तैयारी करें। परामर्श मसौदे पर नज़र रखें और सुझाव दें।
3. रिफंड: जोखिम-आधारित स्वचालित स्वीकृति के लिए GSTR-1, 3B, ई-इनवॉइस और शिपिंग बिल का डेटा एकरूप रखें। नियम 89(4)(C) बदलाव से प्रभावित रिफंड दावों की समीक्षा करें।
4. पूँजीगत माल और इनपुट सेवाओं का आईटीसी: 1 नवंबर 2026 और 1 अप्रैल 2027 की कट-ऑफ तिथियों को देखते हुए खरीद और आईटीसी लेने की योजना बनाएँ।
5. मुकदमेबाज़ी: ₹10,000 से कम के नोटिस पहचानें; गैर-धोखाधड़ी मामलों में 5% घटे जुर्माने का रास्ता परखें; धोखाधड़ी/तथ्य छुपाने के आरोपों पर नए परिपत्र के दिशानिर्देश उपयोग करें; नियम 86A के ब्लॉकिंग मामलों और बहु-वर्षीय नोटिसों की प्रस्तावित सत्यापन-खंड के संदर्भ में समीक्षा करें।
6. आपराधिक जोखिम: धारा 69 के लोप के बाद गिरफ्तारी संबंधी सलाह की पुनः समीक्षा करें; संक्रमणकालीन स्थिति और धारा 132 के अंतिम पाठ पर नज़र रखें।
7. लॉजिस्टिक्स: रोकथाम में राहत के बावजूद परिवहन और डिस्पैच टीमों को दस्तावेज़ों की अनिवार्यता समझाएँ।
8. निर्यातक और सेवा प्रदाता: सेवाओं के निर्यात की संशोधित परिभाषा और आपूर्ति स्थान के नियमों के तहत पात्रता जाँचें।
9. छोटे करदाता: विलंब शुल्क माफ़ी की खिड़की (माह-अंत तक रिटर्न) का उपयोग करें; एआरक्यूपी योजना पर नज़र रखें।
10. दरें: कबाड़ पर आरसीएम/टीडीएस, ईसीओ डिलीवरी सेवाओं, ईवी परिवहन विकल्प और मुक्त सेवाओं के लिए बिलिंग और ईआरपी अद्यतन करें।
11. अनिवार्य सावधानी: अधिसूचना, परिपत्र और संशोधित कानून आने तक प्रतीक्षा करें, क्योंकि केवल वही कानूनी बल रखते हैं।
7. समापन टिप्पणी
57वीं परिषद बैठक मुख्यतः विश्वास-आधारित प्रक्रिया-सुधारों की बैठक है। कर-मुकदमेबाज़ी और रिटर्न-अनुपालन के लिए सबसे महत्वपूर्ण बिंदु हैं: गिरफ्तारी की शक्ति की समाप्ति, अभियोजन की ऊँची सीमा, ₹10,000 की नोटिस सीमा, शीघ्र भुगतान पर घटा जुर्माना, स्वचालित रिफंड ढाँचा, रिटर्न सुधार का नया तंत्र (अप्रैल 2027), बहु-वर्षीय नोटिसों का सत्यापन खंड, तथा क्रेडिट लेजर ब्लॉकिंग और माल की रोकथाम पर सुरक्षा-उपाय। अंतिम कानूनी प्रभाव संशोधनों और अधिसूचनाओं के पाठ पर निर्भर करेगा।
यह नोट पीआईबी की प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर चर्चा के उद्देश्य से तैयार किया गया सार है। यह अधिसूचनाओं, परिपत्रों और संशोधित कानून का विकल्प नहीं है; इस पर निर्भर होने से पहले उनसे मिलान अवश्य करें।


Advocate Sarfaraj Ansari
टैक्स लिटिगेशन एवं रिटर्न कंप्लायंस (Tax Litigation & Return Compliance)
मो: 8545873214