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Friday, 20 February 2026

IGST भुगतान में– अब CGST/SGST ITC का उपयोग ‘किसी भी क्रम’ में!


IGST देयता के भुगतान हेतु CGST/SGST ITC के “किसी भी क्रम” में उपयोग – क्या अधिनियम संशोधन आवश्यक है?

दिनांक 30 जनवरी 2026 एवं 19 फरवरी 2026 को GSTN द्वारा जारी हालिया परामर्श (Advisory) के माध्यम से करदाताओं को यह सुविधा प्रदान की गई है कि वे IGST देयता के भुगतान हेतु CGST एवं SGST इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का उपयोग “किसी भी क्रम (any order)” में कर सकते हैं।

यह व्यवस्था विधिक दृष्टि से एक रोचक प्रश्न उत्पन्न करती है, क्योंकि तकनीकी प्रणाली (GST Portal) ने व्यवहार में उस कठोर विधिक प्रावधान को शिथिल कर दिया है, जो मूल अधिनियम में स्पष्ट रूप से निर्धारित था।


पूर्व विधिक स्थिति

Central Goods and Services Tax Act, 2017 की धारा 49(5)(c) का प्रावधान स्पष्ट एवं अनिवार्य था।

इस प्रावधान के अनुसार SGST क्रेडिट का उपयोग IGST देयता के विरुद्ध तभी किया जा सकता था, जब CGST क्रेडिट उपलब्ध न हो।

अर्थात् ITC उपयोग की एक कठोर श्रेणी (hierarchy) निर्धारित थी:

  1. पहले IGST क्रेडिट पूर्णतः समाप्त किया जाए

  2. तत्पश्चात CGST

  3. और अंत में SGST

वर्षों तक GST पोर्टल की प्रणाली इसी क्रम को बाध्यकारी रूप से लागू करती रही।
परिणामस्वरूप कई व्यवसायों में CGST एवं SGST लेजर में असंतुलन (asymmetry) उत्पन्न होता था और अनावश्यक नकद भुगतान करना पड़ता था।


वर्तमान परिवर्तन – अधिनियम संशोधन की आवश्यकता क्यों नहीं?

अनेक पेशेवर यह प्रश्न उठा रहे हैं कि क्या इस “any order” सुविधा के लिए संसद द्वारा अधिनियम संशोधन आवश्यक है?

स्पष्ट विधिक उत्तर – नहीं।

यह संभव हुआ है 2018 के विधायी संशोधनों के कारण, जब धारा 49B को अधिनियम में सम्मिलित किया गया (प्रभावी 1 फरवरी 2019 से)।

धारा 49B के माध्यम से संसद ने ITC उपयोग की क्रम व्यवस्था निर्धारित करने की शक्ति सरकार को (Rule-making authority) को सौंप दी।

यह एक non-obstante clause है, जिसके कारण धारा 49(5)(c) की कठोर श्रेणी को नियमों के माध्यम से परिवर्तित किया जा सकता है।

अर्थात्:

  • अधिनियम संशोधन आवश्यक नहीं

  • केवल CGST Rules में संशोधन या CGST Rules, 2017 के नियम 88A में परिवर्तन पर्याप्त होगा

(ध्यान दें: नियम 88A मूलतः IGST ITC को CGST एवं SGST देयताओं में बाँटने से संबंधित था।)


महत्वपूर्ण शर्त – GST Council की अनुशंसा

धारा 49B के अंतर्गत सरकार केवल “GST Council की अनुशंसा पर” ही नियम बना सकती है।

अब तक, GST Council की 56वीं बैठक (सितंबर 2025) तक के कार्यवृत्त (Minutes) का अवलोकन करने पर यह स्पष्ट होता है कि परिषद ने औपचारिक रूप से CGST एवं SGST को IGST के विरुद्ध “किसी भी क्रम” में उपयोग की अनुमति देने की अनुशंसा नहीं की है।

इस प्रकार तकनीकी प्रणाली (GSTN) ने विधायी औपचारिकता से पहले सुविधा लागू कर दी है — अर्थात् “technological cart before the legislative horse”।


संभावित समाधान

सरकार निम्नलिखित कर सकती है:

  1. CGST Rules में संशोधन अधिसूचित करे

  2. आगामी GST Council बैठक में इसे अनुमोदित (ratify) कराया जाए


क्या इस पर विधिक चुनौती संभव है?

सामान्यतः विधिक चुनौती तब उत्पन्न होती है जब कोई प्रावधान करदाता के प्रतिकूल हो।

यह “any order” सुविधा:

  • व्यापार सुविधा (trade facilitation) है

  • कार्यशील पूंजी (working capital) अवरोध कम करती है

  • नकदी प्रवाह को अनुकूल बनाती है

चूँकि यह व्यवस्था सार्वभौमिक रूप से करदाताओं के हित में है, अतः व्यावहारिक रूप से इसकी न्यायिक चुनौती की संभावना अत्यंत कम है।


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